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Kashvi Rastogi

Abstract

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Kashvi Rastogi

Abstract

हम

हम

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अकेले हम बूँद हैं,

मिल जाएं तो सागर हैं।


अकेले हम धागा हैं,

मिल जाएं तो चादर हैं।


अकेले हम कागज हैं,

मिल जाएं तो किताब हैं।


जीवन का आनन्द मिलजुल कर

रहने में ही है।


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