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Neelima Deshpande

Abstract

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Neelima Deshpande

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हम इजहार करते हैं

हम इजहार करते हैं

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हम इजहार करते हैं 

और यकीन नहीं तो,

तहे दिल से अपने ही दिल का

आज शुक्रिया भी अदा करते हैं।


वो मासूम सा बैठा रहा,

हर पल मेरे इंतजार में। 

राह में कभी हो कोई साथ,

या फिर हो हम, 

किसी राह पर अकेले।


ये तब भी था साथ मेरे, 

जब लाखों गम थे मुझे घेरे।

कभी सुनी हमने इसकी

और कभी की अपनी ही मनमानी।


यह दिल ही तो था, 

जिसने अनकही बातें भी

मेरी हर बार बड़ा शिद्दत से थी सुनी।


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