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Swarakshi Swara

Abstract


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Swarakshi Swara

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हिंदुस्तान

हिंदुस्तान

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देखो यह है हिंदुस्तान 

खतरे में है यंगिस्तान 

क्षणिक-क्षणिक सी पीड़ाओं पर 

दे देते हैं यह तो जान

देखो यह है हिंदुस्तान।


आज युवाओं के सर चढ़कर भूत लोभ का बोल रहा 

आधुनिकता के चोले में है अंग-अंग को खोल रहा 

रिश्तो के पानी में देखो स्वार्थ- जहर को घोल रहा 

भरी जवानी में ही देखो हर लेते हैं अपने प्राण 

देखो यह है हिंदुस्तान


डूबते जाते प्यार के मद में उम्र की सीमा तोड़कर 

बात-बात पर झगड़ा करके चल देते घर छोड़ कर

ठुकरा देते बाप की खुशियां माता से मुंह मोड़कर

चंद्र पैसों की खातिर देखो बेच रहे हैं यह ईमान। 

देखो यह है हिंदुस्तान


है संघर्ष की बात को भूले, बस वो जाने जीत व हार

जीतने वाला खुशियां मनाता,हारने वाला देता मार

कोई धर्म न कोई मज़हब,बस इनको है जिस्म से प्यार

जिनकी जितनी ऊंची कीमत,उनका उतना है सम्मान

देखो यह है हिंदुस्तान


किनके भरोसे हम सब सम्भले जब बूढों को शर्म नही

दिखते हैं सन्तो के जैसे,पर वो करते धर्म नहीं 

स्वरा नाम है राम-रहिमन, पर उन जैसा कर्म नहीं 

तभी तो उम्र के इस पड़ाव पर, मिलता है इनको अपमान

देखो ये है हिंन्दुस्तान


जागो देश के वीरों जागो,त्यागो तम के अँधियारे

फैलाओ फिर भारत-भू पर सुसंस्कृति के उजियारे

तुम चमन के फूल बनोगे,कल के दिन प्यारे प्यारे

आओ मिलकर कसमें खाओ, रखेंगे भारत का मान 

देखो ये है हिंदुस्तान...।


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