STORYMIRROR

Rajkumar solanki सफ़र

Abstract

4  

Rajkumar solanki सफ़र

Abstract

हिज्र जारी था और जारी है

हिज्र जारी था और जारी है

1 min
458

हिज्र जारी था और जारी है

एक दुःख हर खुशी पे भारी है


ये जो फैली नई बीमारी है

ये किसी की दुकानदारी है


दोस्त ये जो ईमानदारी है

ये सभी की जबाबदारी है


मेरे सर यूँ ग़मो का साया है

आसमा ज्यों जमी पे तारी है


कैसे समझाऊँ सुबह से मैंने

पी नहीं रात की उतारी है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract