STORYMIRROR

Sharvan Kumar Dubey

Inspirational

4  

Sharvan Kumar Dubey

Inspirational

गुरु की महिमा

गुरु की महिमा

1 min
154

गुरु की है महिमा अनन्त, जीवन के गुरु प्रभाकर हैं।

बिन गुरु मिलता है ज्ञान नहीं, शिष्य रश्मि गुरु भाष्कर हैं।

छत्रपति बन गए शिवा, गुरु की महिमा क्या कर डाली।

राष्ट्र भक्ति की महान प्रेरणा, जन जन में जो भर डाली।


गुरु द्रोणाचार्य की कृपा से, अर्जुन सम धनुर्वीर हुए,

प्रेम का पाठ पढ़ाने वाले, रामानन्द शिष्य कबीर हुए।

छत्रसाल सम साधारण, क्या वीर कभी था बन पाता,

प्राणनाथ की थी कृपा, जीतता जहां घोड़ा जाता।


विवेकानन्द सम महापुरुष को, अखिल विश्व ने

किया प्रणाम,

राम कृष्ण परम हंस का, रोम रोम में बसता था नाम।

राणा प्रताप ने स्वाभिमान की, शिक्षा थी गुरु से पाई,

मुगलों के आगे झूके नहीं, घास की रोटी थी खाई।


गुरु की महिमा कितनी पावन, शब्दों में कहा नहीं जाए,

एकलव्य सम धनुर्वीर, गुरु प्रतिमा से शिक्षा पाए।

शिखर तक यदि है जाना, गुरु बिन कौन सहारा दें,

अज्ञान की नदियों में गुरु, ज्ञान की पावन

जलधारा दें।


स्थान प्रभू से है ऊंचा, गुरु का सर्वोपरि है नाम,

वंदनीय, अभिनंदनीय, श्रद्धेय गुरु को प्रणाम।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational