" गर्मी "
" गर्मी "
उफ़ ये गर्मी !
बड़ी जानलेवा होती है,
कार्य करने में आलस आ जाता है,
पसीने की बदबू सहन करनी पड़ती है।
पर , गर्मी में ही फलों का राजा
आम भी तो आता है ,
जो हर घर में स्वाद का जायका दे जाता है,
ठंडी -ठंडी कुल्फी, आइसक्रीम, शिकंजी, शरबत का भी मजा हम गर्मियों में ही लेते हैं।
ठंडी जगहों में जाकर सैर - सपाटे
का मज़ा भी लेते हैं ,
भीषण गर्मी में छायादार पेड़ के नीचे
बैठ पढ़ना भी आनन्द देता है।
अब तो गर्मी से अनेक साधन ए.सी, कूलर , फ्रिज भी निकल चुके हैं,
गांवों में भी ठंडे पेयजल की सुविधा दी
गई है।
भीषण गर्मी की तपिश सहकर ही
मनुष्य कर्मठ बनता है,
उन्नति के रास्ते पर चलता है,
गर्मी ही मनुष्य का असली साथी होता है,
जिसने भी इसका साथ निभाया उसने सफलता की कुंजी पाई है।
