Shivendra Tewari
Abstract Classics Inspirational
सुनाई भी कभी देती थी हरकत उसकी
दिखाई भी देती थी कभी बरकत उसकी
अब जाने क्या गिला है उससे
जाने अब कभी मिलाई नहीं होती।
Untitled
इश्क़ खुदा का
लबों की जुबान...
गिला खुदा से
धरती उसकी पाताल उसका उसकी ही हुकूमत समुद्र में धरती उसकी पाताल उसका उसकी ही हुकूमत समुद्र में
अभी किनारा बड़ा सुदूर कितने पास व कितने दूर, अभी किनारा बड़ा सुदूर कितने पास व कितने दूर,
तोतली भाषा में वह मुझको पापा पापा कहती है तोतली भाषा में वह मुझको पापा पापा कहती है
तेरे सम्मुख घबराये मन, जैसे दे रहा परीक्षा हो ! तेरे सम्मुख घबराये मन, जैसे दे रहा परीक्षा हो !
माँ के आँखों से गिरूं तो ममता के आंसू हूँ मैं माँ के आँखों से गिरूं तो ममता के आंसू हूँ मैं
नाम जप राम जप जपता रह तू राम शुद्ध समर्पण का संज्ञान लक्षित प्रभु परम धाम। नाम जप राम जप जपता रह तू राम शुद्ध समर्पण का संज्ञान लक्षित प्रभु परम धाम।
एक बार के बिछुड़े फिर मिलते नहीं। टूटे हुए फूल डाली में पुनः लगते नहीं एक बार के बिछुड़े फिर मिलते नहीं। टूटे हुए फूल डाली में पुनः लगते नहीं
मिट्टी की सौंधी महक, हवा में घुली मिठास, मिट्टी की सौंधी महक, हवा में घुली मिठास,
बिगड़ेगा कुछ भी नहीं आप मानिए मित्र, बिगड़ेगा कुछ भी नहीं आप मानिए मित्र,
जाति सभी की पूछते, अपने नेता जी रोज। पूछी उनकी जाति तो, अभी रहे हैं खोज।। जाति सभी की पूछते, अपने नेता जी रोज। पूछी उनकी जाति तो, अभी रहे हैं खोज।।
दान दहेज़ में लिपटी विदाई की घड़ी सबसे महंगी, जिसमें न्योछावर माँ-बाप की ज़िन्दगी भर की प दान दहेज़ में लिपटी विदाई की घड़ी सबसे महंगी, जिसमें न्योछावर माँ-बाप की ज़िन्दग...
उलझनों का सिलसिला बस उलझता रहा यादों के झरोखों से देखता भी रहा। उलझनों का सिलसिला बस उलझता रहा यादों के झरोखों से देखता भी रहा।
तभी तो रोज रोज नये नये क़र्ज़ का बोझ बढ़ाता जा रहा है। तभी तो रोज रोज नये नये क़र्ज़ का बोझ बढ़ाता जा रहा है।
दुनिया में सब इंसान एक समान नहीं कोई बहुत गरीब हैं तो कोई धनवान हैं। दुनिया में सब इंसान एक समान नहीं कोई बहुत गरीब हैं तो कोई धनवान हैं।
टूटते सपने लावारिस हालतों में बेघर बेसहारा बच्चे टूटते सपने लावारिस हालतों में बेघर बेसहारा बच्चे
यहां तक कि अपने लिए भी नहीं, सब ढोते हैं खुद को मजदूर की तरह यहां तक कि अपने लिए भी नहीं, सब ढोते हैं खुद को मजदूर की तरह
दर दर भटक रहे होते एक एक बूंद रक्त की भीख मांग रहे होते दर दर भटक रहे होते एक एक बूंद रक्त की भीख मांग रहे होते
राखी लेकर बहना आई। भाई की तब सजी कलाई।। राखी लेकर बहना आई। भाई की तब सजी कलाई।।
हमारी संस्कृति में प्रकृति प्रदत्त हर वस्तु पूजी जाती है, हमारी संस्कृति में प्रकृति प्रदत्त हर वस्तु पूजी जाती है,
वे हैं हमारे महान सैनिक जो इस भूमि पर जन्म लिए। वे हैं हमारे महान सैनिक जो इस भूमि पर जन्म लिए।