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Guddu Bajpai

Abstract


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Guddu Bajpai

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घर कब आओगे

घर कब आओगे

1 min 455 1 min 455

रुठा है मुझसे क्यों मेरा सनम

कि अब भी जमाने में जिन्दा हैं हम

शिकवा जो करते तुम्हें हम बताते

कुछ सुनते तुम्हारी कुछ अपनी सुनाते


बदरा भी बरसे सावन भी आया

तुम्हें ख्याल मेरा कभी न सताया

यादों के लम्हें हैं अब भी रूलाते

देके सदाएं हैं तुझको बुलाते


खता मेरी मुझको बता कर तो जाते

खुद को भी हम कुछ समझा पाते

सूनी है बगिया और घर का आंगन

झलकता है अब भी नैनों से सावन


लगन ऐसे नफरत से मिट न सकेगी

दुआएं भी भला क्या खुदा से कहेगी

जो वादा किया था निभाना पड़ेगा

जनम लेके दुनिया में फिर आना पड़ेगा


बातें करेंगे फिर आधी अधूरी

मिट जाएगी दरमियां की सभी दूरी

कयामत तक क्या मुझे तुम सताओगे

बस इतना बता दो कि घर कब आओगे।


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