एक लड़की
एक लड़की
जब तूने मुझे जन्मा था मां,
मैं एक नन्हीं कली अनोखी थी।
अब भी तेरा स्पर्श मुझे अपना लगता है,
बाकी संसार दिखावा है।
जहां जन्म हुआ घर केवल बस घर लगता है,
बाकी संसार पराया है।
अपने घर पापा तक की बात नहीं सुनती थी,
यहां पति की बातों के संग लातें भी सह लेती हूं।
अब बिना कहे कुछ, लाखों दुख दिल में रख लेती हूं।
मां, जब तकलीफ़ हद से ज्यादा बढ़ जाती,
तो एक कोना पकड़ अकेले में जी भर के रो लेती हूं।
सिसकियां अब भी लेती हूं मां,
पर बचपन जैसे अब तुझ तक नहीं पहुंचती हैं।
तेरे साथ मैं ज़िंदा थी, अब शायद ही मैं ज़िंदा हूं।
जितनी सांसें दी हैं ईश्वर ने,
मैं उन्हें हंसकर ही जी लेती हूं।
मां, पर जब अंदर से मैं थक जाती हूं,
बिना कारण ही रो लेती हूं।
शायद मैं एक दिन किसी से
कुछ बिना कहे यूं ही मर जाऊं...
शायद मैं यूं ही मर जाऊं....
