ए खुदा
ए खुदा
ए खुदा, क्या तेरी ये माया ?
पलट दी पूरी ज़िंदगी की एक पल में काया
ना सर पर कोई हाथ ना मां बाप का साया
तन्हा लड़ रही हूं न है कोई छत्र छाया
अमृत बरसाकर सब पर अपना
सारी जिंदगी हमने विष ही है पाया
कड़वा सच अब एक समझ आया
कि सब है सिर्फ एक मोह माया.....
