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Surabhi Agarwal

Abstract

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Surabhi Agarwal

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ए खुदा

ए खुदा

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ए खुदा, क्या तेरी ये माया ?

पलट दी पूरी ज़िंदगी की एक पल में काया

ना सर पर कोई हाथ ना मां बाप का साया

 तन्हा लड़ रही हूं न है कोई छत्र छाया 

अमृत बरसाकर सब पर अपना

 सारी जिंदगी हमने विष ही है पाया

कड़वा सच अब एक समझ आया 

कि सब है सिर्फ एक मोह माया.....


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