STORYMIRROR

Shikha Sanghvi

Abstract

2  

Shikha Sanghvi

Abstract

दरार से आई रोशनी

दरार से आई रोशनी

1 min
422

छोटे से घर के कमरे में 

बंद किये गए कमांड की

दरार से आई रोशनी 

उम्मीदों की डोर थामे 

लग गया कोशिश में 


 उलझनों से निकलकर 

ज़िन्दगी जीने के लिए 

साँसों में भर रहा है

हवा से खुशबू।

 

आशा की किरण 

एक बार फिर खड़ा होने को

निराशा के अंधकार को

ख़ुशी से भेदने को। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract