STORYMIRROR

Amal Samad

Abstract

3  

Amal Samad

Abstract

दिल है पवित्र

दिल है पवित्र

1 min
130

तुम मेरा पवित्र 

दिल है पवित्र 

प्यार है पवित्र

पवित्र था प्रेम तेरा मेरा,

 ना कोई जगह छल की थी।


ना कोई पहल मिलन की थी। 

पवित्र था वो प्रेम मेरा,

जिसे जरुरत था अंतिम सांसें तक

निर्मल प्रेम था जो मेरी

तमन्ना उसे सदा दिल में रखने की थी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract