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Indrajeet Sen

Abstract

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Indrajeet Sen

Abstract

देखना चाहता हूँ

देखना चाहता हूँ

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(समाज के अंतिम व्यक्ति की और से प्रार्थना )


अधूरी रह गयी थी जो वो बरकत देखना चाहता हूँ

या खुदा मैं तेरी रहमत देखना चाहता हूँ 


(वर्तमान परिस्थितियों की और से )


मैं जुर्मों ओर दुष्कर्मो की मय्यत देखना चाहता हूँ 

में भारत की बेटी के ख्बाबों की अदालत देखना चाहता हूँ


(जिस देश में भरत ने बड़े भाई के लिए देश के सबसे बड़े सिंघासन को छोड़ दिया उस देश की पारिवारिक दशा के लिए )


बांट दिया था जिसने काल चार भाईयों को 

में उस मुसीबत की वजह जो बनी , वो वसीहत फेंकना चाहता हूँ 


(बुढ़ापे में व्यक्ति की इच्छा )


मुकम्मल होते हुए , मैं अब बस एक मन्नत देखना चाहता हूं

माँ -मैं एक बार फिरसे तेरे आँचल में सोकर के जन्नत देखना चाहता हूँ



(भारत के प्रत्येक व्यक्ति का सपना दर्शाने की कोशिश )


न करे गुमां जो अपने उजाले पर , वो सूरज देखना चाहता हूँ 

में अटल ओर अबदुल के सपनो की सूरत देखना चाहता हूँ




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