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gulafshan begum

Abstract

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gulafshan begum

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दान

दान

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 हृदय में विनम्रता और सौहार्दता का भाव जगाइए 

 मुक्त मन से अकिंचित को बहुमूल्य कुछ दान कर आइये।। 


 विधाता के निकट पहुँचने का अवसर कदापि न गँवाइये

 मुस्कुराहट के साथ नि:स्वार्थ चित्त से गुप्तदान कर आइये।


आशा की ज्योति जलाकर निराशा के घिरे बादल हटाइये 

मददगार बन जरूरतमंद का आँगन दीप्तिमान कर आइये।।


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