चमके कुछ इस तरह अपने हिदुस्तान को
चमके कुछ इस तरह अपने हिदुस्तान को
कर बुलंद कुछ और अपने हौसलों को
गिराये अब हर फ़र्क़ की दीवार को
चांद सूरज दोनों की रोशनी हो शामिल हो जिसमें
आओ चमकाए कुछ इस तरह अपने हिदुस्तान को।
