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Anupam Mishra

Abstract

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Anupam Mishra

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चैन

चैन

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तकदीर को रोते फिरे हम

तस्वीर भी धूँधली हो चली,

तकलीफ़ बढ़ती ही रही,

तलाशने चैन को जो निकली

तह में हृदय के वो सिमटी मिली।


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