STORYMIRROR

Vatan Kumar

Inspirational

3  

Vatan Kumar

Inspirational

चाँद पे भी दाग होता है

चाँद पे भी दाग होता है

1 min
532

नाकामयाबी के अंधेरे में

तू क्यों हौसला खोता है

सारे जहां को रौशन करने वाले

चाँद पे भी तो दाग होता है।


ज़िद की ज्वाला बुझा कर

तू क्यों खुद राख होता है

दुनिया को ज़िंदा रखने वाले

सूरज में आग ही तो होता है।


सपने देखने की उम्मीद से

तू बेचैन हो के सोता है

हर काली रात के बाद

एक नया सवेरा होता है

एक छोटी दौड़ हार के

तू क्यों दिल ही रोता है

तुझे आसमानों में उड़ना है 

बादलों ने भी भेजा न्यौता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational