End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!
End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!

Parul Verma

Abstract


3  

Parul Verma

Abstract


चाँद का खेल

चाँद का खेल

1 min 208 1 min 208

छुप कर चाँद बादलों की छाँव में 

कोई खेल खेलता नजर आता है 

जब नज़रे ढूंढ रही उसे बेकरारी से 

वो और छुपता चला जाता है 


उन्हों ने मेरी चाहत को 

चाँद से कुछ यूँ जोड़ दिया 

चाँद ने भी ना नज़र आ कर

दिल मेरा कुछ तोड़ दिया 


मैं भी जैसे हार कर 

वापस घर को जाने लगी 

चाँद की किरणे भी 

बादलो के पीछे मुस्कुराने लगी 


चुपके से बहने लगी 

मदमस्त सी शीतल हवा 

और चाँद ने धीरे से 

बादलो के पीछे से दर्शन दिया 


मैं चमक सी गयी 

चांदनी की दोधुली काया में 

मुस्कुरा उठे मेरे होंठ 

चाँद की इस माया पे!



Rate this content
Log in

More hindi poem from Parul Verma

Similar hindi poem from Abstract