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MD Patel

Abstract

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MD Patel

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बस यूंही चल रही है जिंदगी

बस यूंही चल रही है जिंदगी

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जब दोस्त मिला काम की जगह पर

हंस कर पूछा, कैसी चल रही है जिंदगी?

यूँ ही शांत खड़ा रहा उसी जगह पर

और सोचने लगा, कि क्या बताऊं मैं

और मन में ही बोलने लगा जिंदगी पर,

सुबह जब जल्दी उठना पड़ता है

तो आलस आती है बहुत, पर

दिल को मैं ही संभाल लेता हूँ, 

पैसे कमाने की झूठी आस पर

जब खाने जाता हुं केन्टीन मैं, सब्ज़ी-रोटी, 

थोड़ा सलाद भी मिल जाता है दाल चावल पर

कपड़े धोने में दिन होता है बेकार, फिर भी

खुश हो जाता हुं कपड़े के दीदार पर

कोई नहीं है बना कर खिलाने वाला

तो कुछ जुगाड कर लेता हुं शहर के रास्ते पर

उसने मुझे जोर से हिलाकर फिर से पूछा,

यार ,कैसी चल रही है जिंदगी?

मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा, 

बस यूँ ही चल रही है जिंदगी!


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