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ANIL SAINI

Inspirational

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ANIL SAINI

Inspirational

बस मैं ही तो हूं ... ईश्वर

बस मैं ही तो हूं ... ईश्वर

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बस मैं ही तो हूं...

बारिश बनके खेत में, 

रेगिस्तान की रेत में I

चिड़िया बनके घोसले में, 

इंसान के हौसले में I

सूरज बनके धूप में, 

प्रकृति के रूप में I

इस असीम जहान में, बस मैं ही तो हूं...


पंछी की उड़ान में,  

बादलों के मैदान में I

इंतजार करती आंखों में,

नाचते मोर की पंखों में I

प्यास बनके गागर में,

महान बनके सागर में I

इस असीम कायनात में, बस मैं ही तो हूं...


सुबह की ठण्डी समीर में, 

किरण बने तिमिर में I

बच्चे की ख्वाहिश में, 

जिन्दगी की रवाईश में I

नींद की असीम शांति में, 

बदलाव की क्रांति में I

इस असीम कुदरत में, बस मैं ही तो हूं...


बसंत के आरम्भ में, 

जीवन के प्रारम्भ‍ में I

मानव के निर्वाण में, 

सत्य के प्रमाण में I

दोस्ती की साख में, 

बची हुई राख में I

इस असीम फलक में, बस मैं ही तो हूं... 


गंगा की धार में,  

मां के निर्मल प्या्र में I

यौवन के जुनून में,

रगों में बहते खून में I

स्त्री की शक्ति में, 

भक्त की भक्ति में I

तेरी हर फरियाद में, बस मैं ही तो हूं ... ईश्वर।


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