बस मैं ही तो हूं ... ईश्वर
बस मैं ही तो हूं ... ईश्वर
बस मैं ही तो हूं...
बारिश बनके खेत में,
रेगिस्तान की रेत में I
चिड़िया बनके घोसले में,
इंसान के हौसले में I
सूरज बनके धूप में,
प्रकृति के रूप में I
इस असीम जहान में, बस मैं ही तो हूं...
पंछी की उड़ान में,
बादलों के मैदान में I
इंतजार करती आंखों में,
नाचते मोर की पंखों में I
प्यास बनके गागर में,
महान बनके सागर में I
इस असीम कायनात में, बस मैं ही तो हूं...
सुबह की ठण्डी समीर में,
किरण बने तिमिर में I
बच्चे की ख्वाहिश में,
जिन्दगी की रवाईश में I
नींद की असीम शांति में,
बदलाव की क्रांति में I
इस असीम कुदरत में, बस मैं ही तो हूं...
बसंत के आरम्भ में,
जीवन के प्रारम्भ में I
मानव के निर्वाण में,
सत्य के प्रमाण में I
दोस्ती की साख में,
बची हुई राख में I
इस असीम फलक में, बस मैं ही तो हूं...
गंगा की धार में,
मां के निर्मल प्या्र में I
यौवन के जुनून में,
रगों में बहते खून में I
स्त्री की शक्ति में,
भक्त की भक्ति में I
तेरी हर फरियाद में, बस मैं ही तो हूं ... ईश्वर।
