STORYMIRROR

Tarif Ansari k

Abstract

3  

Tarif Ansari k

Abstract

बेटी

बेटी

1 min
24

      

हर चीज को जो संजोती थी... वो मेरी बेटी थी

जो हर दुःख भी मुझसे छुपाती थी,

हर ग़म में भी मुस्कुराती थी....  ऐसी मेरी बेटी थी।

एक आवाज़ से जो पास आ जाये, वो रातों को कहाँ सोती थी।

उसके होने से घर मेरा मुकम्मल था....

मुझे आज तक नहीं पता.. रहता कहाँ मेरा कम्बल था?

उसके होने से घर मेरा मुकम्मल था ....!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract