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suryanarayan gupta

Inspirational Children

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suryanarayan gupta

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🌹बेटे के नाम पाती 🌹

🌹बेटे के नाम पाती 🌹

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   बेटे!

   मैंने

   अपने जीवन ज्योति से

   तेरे जीवनपथ काे सजाया

   उस पर

   प्रकाश ही प्रकाश फैलाया

   तेरे अंधेरे को

   सदैव ही गले लगाया

   जलतेजलते जब

   मेरा जीवन दीप ज्याेतिहीन हाे गया

   मेरा उजाला

   तेरे उजाले में खाे गया

   तू जवान / मैं बूढ़ा हो गया

   ऐसे में

   यह कैसा दिन आया?

   प्यार के बदले

   तुम से उपेक्षा ही उपेक्षा पाया

   हर ओर

   अंधेरा ही अंधेरा छाया

   

मैंने तुम्हें

   सदैव चूमा / चाटा / दुलारा

   तूने मुझे किश्तों में मारा

   मेरे मन में तेरे लिए सदैव

   स्वस्थ, दीर्घायु की कामना

   तेरे मन में मेरे लिए

   शीघ्र माैत की चाहना

   अमावस के इस पहर में

   खंडित रिश्ते के शहर में

   खून के रिश्ते को तूने

   इतनी सहजता से भुलाया

   बेटे!

   जीवन के इस लीला काे मैं

   समझ नहीं पाया

   तूने

   मेरे इस टिमटिमाते जीवन दीप को

   टूटेफूटे काेने में फेंके गए

   अपने आस्था के बदबूदार

   सूप में रख कर

   कटुवाणी से मारमार कर

   दीपावली की रात्रि के अन्तिम पहर में

   दरिद्र खेदने की रस्म की तरह

   मुझे भी दरिद्र समझ व्यवहारतन

   मन /वचन/कर्म से प्रताड़ित कर कर

   खदेड़ खदेड़ कर घर से भगाया

   जीवन के इस अन्तिम पहर में

    बेटे!

    तूने यह कैसा खेल रचाया?

    क्या तुम्हें

    तनिक लाेकलाज भी नहीं आया?

 नाेट : चार पुत्राें के बाप को, दीपावली की शाम को

घर से बाहर लिट्टी सेकते हुए देखकर यह कविता

प्रस्फुटित हुई।।


      


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