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Abstract

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बचपन

बचपन

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नादान थे बचपन में हम

ज़िंदादिल हुआ करते थे 

अब तो बस 

चंद ख़्वाब हैं  

जिन्होंने संभाले रखे हैं मुझे 


जिंदगी की चकाचौंध में 

सुकून गंवा बैठे हैं 

अब तो बस 

चंद ख़्वाब है 

जो संभाले रखे हैं मुझे 


शिकायते भी नहीं करते अब हम

बस मुस्कुरा देते हैं 

अब तो बस 

चंद ख़्वाब हैं

जिन्होंने संभाले रखे हैं मुझे !


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