STORYMIRROR

Saibalini Rayaguru

Inspirational

4  

Saibalini Rayaguru

Inspirational

अतिथि को अब दूर से प्रणाम

अतिथि को अब दूर से प्रणाम

1 min
196

जिस दिन तुम आए तब थी खुशियां,

जिस दिन तुम सबके पास तब छा गई सबमें बेतबियां।

पर लगता ऐसे की तुम ऐसे अतिथि हो जो आने से जाओगे नहीं

इसलिए कोई तुमसे मिलने जाता नहीं।


जाओगे नहीं अलग बात है

पर सबसे भिन्न तुम्हारा बर्ताव है

बोलो अब क्या करें ?

तुम्हारे आने की गम में रो पड़े !

सही कहा किसी ने की कोई नहीं आना चाहे तो नहीं आएगा,

और नहीं जाना चाहे तो कभी नहीं जाएगा ।


जिंदगी की पक्तियों से कौन मुंह मोड सके

मौत आने से कौन चुप सके।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational