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Ashwin Kumar Lihala

Abstract

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Ashwin Kumar Lihala

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ऐ खुदा ! हम भी तो आप ही के थे

ऐ खुदा ! हम भी तो आप ही के थे

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टूट तो हम धीरे-धीरे रहे थे...

पर ज़िंदगी मे हम लड़ भी तो रहे थे...

आख़िर इतनी भी क्या जल्दी थी...

ऐ ख़ुदा! हम भी तो आप ही के थे।


गिरने तो हम लगने लग रहे थे...

पर ज़िंदगी मे हम खड़े भी तोह हो रहे थे...

आख़िर इतनी भी क्या जल्दी थी...

ऐ ख़ुदा! हम भी तो आप ही के थे।


हारते तो हम जा ही रहे थे...

पर ज़िंदगी मे सीख़ भी तो रहे थे...

आख़िर इतनी भी क्या जल्दी थी...

ऐ ख़ुदा! हम भी तो आप ही के थे।


रोते तो हम हमेशा से ही थे...

पर ज़िंदगी म हंसने की वजह भी तो थे...

ज़िंदगी मे आगे बढ़ जीना चाहते थे..

आखिर थोड़ा सा तो इंतज़ार कर...

ऐ ख़ुदा! हां हम भी तो आप ही के हैं ।



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