ऐ खुदा ! हम भी तो आप ही के थे
ऐ खुदा ! हम भी तो आप ही के थे
टूट तो हम धीरे-धीरे रहे थे...
पर ज़िंदगी मे हम लड़ भी तो रहे थे...
आख़िर इतनी भी क्या जल्दी थी...
ऐ ख़ुदा! हम भी तो आप ही के थे।
गिरने तो हम लगने लग रहे थे...
पर ज़िंदगी मे हम खड़े भी तोह हो रहे थे...
आख़िर इतनी भी क्या जल्दी थी...
ऐ ख़ुदा! हम भी तो आप ही के थे।
हारते तो हम जा ही रहे थे...
पर ज़िंदगी मे सीख़ भी तो रहे थे...
आख़िर इतनी भी क्या जल्दी थी...
ऐ ख़ुदा! हम भी तो आप ही के थे।
रोते तो हम हमेशा से ही थे...
पर ज़िंदगी म हंसने की वजह भी तो थे...
ज़िंदगी मे आगे बढ़ जीना चाहते थे..
आखिर थोड़ा सा तो इंतज़ार कर...
ऐ ख़ुदा! हां हम भी तो आप ही के हैं ।
