STORYMIRROR

Sahil Shingala

Abstract

3  

Sahil Shingala

Abstract

अहेसास सुहाना

अहेसास सुहाना

1 min
383

किसी को जानना होता हे

किसी को मानना होता है

किसी किसी को तो पाया भी जाता है

पर बड़े कम हसीन होते है जिसे जिया जाता है


किसी की चाह होती है 

किसी की राह होती है

किसी के लिए जुनून होता है पाने का

 पर वो तो वो है जिसका हमें सुकुन है


लब्ज बया करते हे किसी पे

तो किसी के लिए अल्फ़ाज़ भी है

नज्म और मुशायरे भी फिदा होते है कई पे

पर वो खास जिससे खामोशियां बात करती है


यादों में उसके लम्हे होते है

होते है किसी के साथ किस्से पुराने

किसी की याद रह जाते हैं आगाज़ सराने

 पर तेरी तो हर याद ही अहसास हे सुहाना।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract