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Sanjeevan Kumar Singh

Romance Fantasy Others

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Sanjeevan Kumar Singh

Romance Fantasy Others

अधूरी मोहब्बत का अनंत सफर

अधूरी मोहब्बत का अनंत सफर

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हमें पता है—

कभी मिल नहीं पाएँगे हम,
पर आसमान में तारों की तरह
टिमटिमाते रहेंगे हम…

जब भी याद आएगी तुम्हें,
बस एक बार नज़र उठाकर देख लेना—
कहीं न कहीं उसी अनंत नीले आकाश में
हम चमकते मिल जाएँगे तुम्हें।

कभी हल्की सी धुंध बनकर,
कभी उजली सी रोशनी बनकर,
कभी एक अधूरी सी चमक बनकर
तुम्हारे एहसासों में उतर जाएँगे हम।

उदास होंगे जब तुम,
तो हम भी धुंधले-से हो जाएँगे,
टूटते तारे की तरह बिखरकर
तुम्हारी पलकों पर आ गिरेंगे हम।

और जब तुम मुस्कुराओगे,
तो चाँदनी में नहाए हुए
एक उजले ख्वाब की तरह
तुम्हारे आसपास बिखर जाएँगे हम।

खिलखिला उठोगे तुम ज़रा सा भी,
तो हवाओं में घुलकर
हंसी बनकर गूंजेंगे हम,
बस महसूस कर लेना…
हम वही होंगे।

कभी जब तुम्हें हमारी याद आएगी,
तो हम भी कहीं दूर बैठकर
तुम्हारा नाम लेंगे चुपचाप…
और आँखों से बहते अश्कों में
तुम्हारी तस्वीर बनाएँगे हम।

हर पल टूटकर बिखर जाएँगे,
जैसे सूखे पत्ते हवाओं में उड़ते हैं,
वैसे ही अपनी यादों को
तुम तक भेजते रहेंगे हम।

बारिश बन जाएँगे हम,
तुम्हारी छत पर टपकती बूंदों में,
तुम्हारी हथेलियों पर गिरती ठंडक में,
तुम्हारे बालों से फिसलती नमी में—
बस पहचान लेना हमें।

जब भी तुम भीगोगे उस बारिश में,
समझ लेना—
हमने ही छुआ है तुम्हें
अपने भीगे हुए एहसासों से।

मिलने की आस बहुत है,
दिल हर रोज़ यही कहता है—
"शायद आज, शायद अभी…"
पर सच ये भी है कि
ये दूरी कभी मिट नहीं पाएगी।

फिर भी,
हम हर रोज़ तुम्हारे करीब आएँगे,
खामोशी में तुम्हारा नाम गुनगुनाएँगे,
और बिना छुए तुम्हें
छू जाने का अहसास दिलाएँगे।

दूर होकर भी पास रहेंगे,
बिना आवाज़ के बात करेंगे,
बिना दिखाई दिए
तुम्हारे हर एहसास में जिएँगे हम।

कभी तुम अकेले बैठोगे,
और अचानक एक सुकून सा मिलेगा—
वो हम होंगे,
तुम्हारे पास चुपचाप बैठे हुए।

कभी दिल भारी होगा तुम्हारा,
और वजह भी समझ नहीं आएगी—
वो भी हम ही होंगे,
जो तुम्हें याद कर रहे होंगे उसी वक्त।

सारी उम्र यूँ ही गुजर जाएगी,
तुम मुस्कुराओगे, हम भी मुस्कुराएँगे,
तुम आगे बढ़ जाओगे,
पर हम वहीं ठहर जाएँगे—
तुम्हारी यादों के उसी मोड़ पर।

तुम्हें देखकर हर बार
दिल को सुकून मिलेगा,
चाहे वो मुलाकात सिर्फ ख्वाबों में ही क्यों न हो।

भूल नहीं पाओगे हमें,
और हम भी तुम्हें भुला नहीं पाएँगे,
ये रिश्ता शायद नाम का नहीं—
पर एहसासों से कहीं गहरा है।

तुम्हारी हर याद में हम होंगे,
और हमारी हर धड़कन में तुम…

जब-जब तुम पीछे मुड़कर देखोगे,
एक साया साथ चलता दिखेगा—
वो हम होंगे…

जब-जब तुम आगे बढ़ोगे,
एक दुआ तुम्हारे साथ चलेगी—
वो भी हम ही होंगे…

और जब कभी बहुत अकेले हो जाओगे तुम,
तो बस आँखें बंद कर लेना—
हम मिल जाएँगे तुम्हें
तुम्हारी ही सांसों के बीच।

कभी चुपके से तुम्हारे सपनों में आएँगे,
कभी किसी पुराने गाने में छुप जाएँगे,
कभी किसी खुशबू में घुलकर
तुम्हें छू जाएँगे हम।

तुम्हारे हर "क्यों" का जवाब नहीं बन पाए,
पर तुम्हारे हर "काश" में जरूर रहेंगे हम।

समय बीतता रहेगा,
लोग बदलते रहेंगे,
पर एक चीज़ कभी नहीं बदलेगी—
तुम्हारे लिए हमारा एहसास।

तुम चाहे कितनी भी दूर चले जाओ,
हमारी यादें तुम्हें ढूंढ ही लेंगी,
कभी एक मुस्कान बनकर,
कभी एक टीस बनकर…

और तब तुम समझ जाओगे—
हम सच में कभी गए ही नहीं।

बस एक वादा है तुमसे—
जब भी आसमान की तरफ देखो,
जब भी बारिश को महसूस करो,
जब भी चाँदनी में खो जाओ—

बस ज़रा हमें देख लेना…

हम वहीं होंगे…
तुम्हारी ही दुनिया में,
तुम्हारे ही आस-पास,
तुम्हारी ही याद बनकर…

हमेशा…
सिर्फ तुम्हारे लिए।

स्वरचित संजीवन कुमार सिंह ✍️ 


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