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Shreshtha Sengupta

Tragedy

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Shreshtha Sengupta

Tragedy

बदला

बदला

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"गुज़र गए दिन

यही कुछ पाँच; 

नहीं, सात दिन | "


यहाँ कुछ सात दिनों से पड़ा हूँ |

कुछ समझ नहीं आ रहा हैं कि, मुझे यहाँ क्यों रखा गया है ...



मुझे इतना पता है कि,

मैं कोमा में हूँ |


बचपन से ही सोचता था की मृत्यु क्या हैं?

जब इस शरीर से आत्मा निकल कर उस रहस्मय व अदभुत आकाश की ओर जाकर मिलेगी, तब क्या वो स्वर्ग का रास्ता ढूँढ पाएगी ?



याद आता है वो दिन जब हम पुलिस मेें भर्ती होने चले थे।


याद आता है वो दिन जब हमने इस देश की रक्षा करने का वादा किया था | 


अब मेरी एक ही इच्छा है दोस्तों,


काश मैं उन 160 देशवासियों की मृत्यु का बदला ले सकू  |



लेकिन,

मुझे पता है,

मैं कोमा में हूँ


हो सके तो बदला ले लेना दोस्तों...


मुझे तो मृत्यु ने बुलाया हैं।


जय हिंद।






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