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मेरी कहानी,मेरी जुबानी
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© स्वराक्षी swrakshi स्वरा swra

Drama Romance

6 Minutes   201    3


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एक लम्हा आता है,,,,और जिंदगी में बहुत कम आता है,जब हम पुरानी जिंदगी से निकल कर नई जिंदगी में कदम रखते हैं ।जब गमों की बदली से हटकर नई सूर्य की किरणें जिंदगी की स्याह कालिमा को पल भर में ही लालिमा में बदल देती है ।

ये वही लम्हा होता है,,,,जो हर पुराने जख्मों को भरने के लिए एक बार जरूर आता है।यदि उस वक़्त उस अनूठे लम्हें को संजीदगी से समझ लिया जाय तो फिर जिंदगी बोझिल और सपने बेरंग नहीं रहते ।उसमे कई रंगों के फूल खिल उठते हैं जो अपनी खुशबू से पूरी जिंदगी को खुश-रंग बना देती है ।

मेरी जिंदगी में भी इस लम्हें ने दस्तक दी।हालांकि पहले तो मैंने इसे न समझा ।अपने ही ग़मो में डूबी रही।खुद को हर ओर से अलग-थलग कर अपनी खामोशी की दुनियां में खोती चली गयी ,,,,,,,,,मगर फिर ना जाने कैसे मैंने इस लम्हें को हाथ बढ़ाकर पकड़ लिया और खुद को नाकामी और बेनामी के अंधेरों से निकाल कर जिंदगी के हसीन पलों में कदम रखा । मैं अपनी जिन्दगीं की उन्हीं कुछ हसीन पलों की हसीन यादें आपसे शेयर कर रही हूं ।मेरे जीवन की हसीन यादें,,,,,शायद आपको अच्छा लगे और आप खुद की यादों में खो जाएं ।


दुनियां का हर इंसान प्यार की उम्मीद करता है ।चाहे वो अमीर हो या गरीब,बूढ़ा हो या जवान,,,,हर किसी के दिल मे चाहत की तरंगें हिलोरें लेती हैं ।मेरे दिल मे भी यही चाहत थी ।मैंने भी इसकी उम्मीद की और इसकी खोज में मन को भटकाया भी ।बहुत लोग मिले जो मुझसे प्यार का दावा करते और तो और कईयों से तो मैंने दोस्ती भी की,मगर वो नहीं मिला जिसकी मुझे तलाश थी।हर किसी मे कोई न कोई कमी ही नजर आयी ।सबकी आँखों में वासना के दीये जलते देखे ।हर कोई सिर्फ हासिल करना चाहता था । यह देख धीरे-धीरे खुद के दिल को संभाल लिया और सोच लिया कि शायद मुझे प्यार नसीब नही है ।शादी के बाद ही हो।खैर समय बीतता गया औऱ मैं खुद में ही मस्त रहने लगी ।

दोस्तों के साथ मस्ती करते हुए कब मैं फाइनल ईयर में आ गयी,पता ही नहीं चला । घर वालों ने मेरी शादी कर दी।लड़के के बारे में मुझे कुछ भी नहीं पता था,,,,,,हालांकि मैंने शादी से इनकार भी किया था,मगर मेरी एक न चली ।ख़ैर शादी के कुछ दिन नहीं,कुछ घण्टों के बाद ही पता चला कि हमारे प्यार का सिक्का यहां भी खोटा निकला । हमारे रिश्ते का कोई मेल ही नहीं था ।अब किसी की कमजोरी को यूं सरेआम तो नहीं करूंगी,पर इतना समझ लीजिए कि मेरी शादी उस व्यक्ति के साथ हुई,जिसे प्यार की abc,,,, तक नहीं पता था ।

मैं अपने नसीब को कोसती हुई खूब रोई,मगर दिल को ये कहकर समझा लिया कि धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा ।मेरे अरमान मेरे दिल मे ही कैद होकर रह गए थे ।मैंने अपने ख्वाहिशों का गला खुद के हाथों ही घोंट दिया और हर उस वस्तु से खुद को अलग कर लिया,जिसमे सौंदर्य था ।इसे भगवान की मर्जी मान कर मैंने खुद को खुद ही समझा लिया ।

शादी के 4 महीने होते ही मेरा और मेरे पति के बीच लड़ाई होने लगी । ये छोटी लड़ाई कब युद्ध मे बदल गया पता ही नहीं चला ।कई बार तो आत्महत्या की भी कोशिस की पर नसीब का सिक्का यहां भी नहीं चला ।हर बार बच जाती ,और बचती भी कैसे नहीं ,,,,,मेरी जिंदगी से किसी और कि डोर जो बंध चुकी थी । भगवान ने मुझे एक प्यारी बेटी से नवाज़ा ,,,जिसको देखकर मन प्रसन्न हो गया । और एक ऐसा दोस्त भी मिला जिसने मुझे शादी के बाद बहुत संभाला था और कई मुशिकलों से निकाला भी था ।मैं उससे कभी मिली तो नहीं,मगर बातें अक्सर हुआ करतीं थीं ।

कहते हैं न कि बातें,मुलाकातें अक्सर हों तो प्यार हो जाता है ।बस यूं ही समझ लीजिए ।उस अंजाने,अनदेखे की हर बात मुझे अच्छी लगने लगी ।हर खुशी,हर ग़म उससे केवल उससे ही साझा करने लगी ।दिल हर वक़्त उसकी बातों में ही खोया रहने लगा ।धीरे-धीरे मुझे एहसास होने लगा कि ,,,,,,,मैं उससे प्यार करने लगी हूँ ।

मैं अजीब सी मस्ती में डूबी रहती ।उससे बात करके मेरा दिन अच्छा गुजरता था ।हमेशा अपनी जिंदगी से बेजार रहने वाली मुझे खुद से भी प्यार होने लगा था ।लेकिन मेरे मन मे दो ऐसे सवाल अक्सर कुलबुलाते कि

1........जिससे मैं प्यार करती हूं,क्या वो भी मुझसे प्यार करता है ?

2....... क्या मेरा प्यार करना सही है ?

मेरा शादी शुदा होना,उस पर एक बेटी की माँ ,,,,,,,,क्या वो मुझसे प्यार करता होगा? धीरे धीरे इन फालतू सवालों में उलझती चली गयी ।न तो कुछ पूछ पाती और न ही कह पाती । बस खुद में घुलती रहती । ये इंसान भी न अजीब होता है,,,जब कुछ न मिले तो उसे पाने के लिए हर प्रयास करता है,किंतु वही जब मिल जाता है तो उसे सम्भाल पाने में ही असमर्थ हो जाता है । शायद मैं भी यही करने चली थी ।लेकिन कहते हैं कि

"खामोशी की जुबान बहुत लंबी होती है "

उसने बिना कहे ही मेरे दिल की बात को समझ लिया,इसलिए तो एक दिन उसने मुझसे अपने प्यार का इज़हार कर ही दिया । मेरा तो रोम-रोम खुशी से खिल उठा।मैंने तो सिर्फ ख़्वाहिश की थी और उसने उसमे रंग डाल कर उसे जीवंत बना दिया था ।उसने मुझे प्यार के मायने समझाए ।मुझे हर पल जिंदगी कक भरपूर जीने की कला सिखाई ।

आज हमारी शादी को पूरे 4 साल हो गए हैं ।मैं अपनी बेटी के साथ पति से अलग रह रही हूँ ।मेरे इस फैसले से मेरे परिवार वालों ने भी मेरा साथ छोड़ दिया है,किंतु मैं बहुत खुश हूँ ,,,मैं खुश हूँ कि मेरे साथ उस व्यक्ति का प्यार है,जो हमेशा मुझे खुश ही देखना चाहता है ।

हालांकि हम जानते हैं कि मैं और वो दोनों ही अलग-अलग राहों के मुसाफ़िर हैं,जो कभी एक साथ नहीं चल सकते ।हम कभी भी इस बात की उम्मीद नहीं करते कि ,,,,,,,,हमारा मिलन होगा ,,,,,,,क्योंकि ये अम्भव है ।फिर भी मैं उससे बेइंतहा प्यार करती हूं और करती रहूंगी ,क्यूंकि वो मेरी जिंदगी है।उसके आने से ही मेरी जिंदगी बदली है ।हमेशा पतझड़ रहने वाला दिल का मौसम बहारों में झूमने लगा है ।

हम अलग हैं,लेकिन हमारे रिश्ते में हर रंग मौजूद हैं।चाहे वो दोस्ती हो,प्यार हो,दुश्मन हो या भाई हो या,,,कुछ और,,,,,,।उसने मुझे जीना सिखाया ।मेरे लबों को हर पल हँसना सिखाया ।मेरी कलम को ताकत भी उसने ही दी है ।

हम नहीं मिलेंगे,,,, तो क्या हुआ,,,हमारे रिश्ते को किसी बंधन की जरूरत नहीं है ,,,हमारा प्यार पावन और सत्य है ।हमारे प्रेम को किसी भौतिक बंधन में बंधने की आवश्यकता नहीं है,क्योंकि बंधन तो दो आत्माओं के बीच बांधा जाता है और हमारी आत्मा तो एक है ।

हमने बहुत कोशिश की,कि एक दूसरे से दूर चले जाएं,,,,भूल जाएं,,,,,मगर हर बार नाकामयाब ही रहे ।हमारा मिलन तो शायद कभी सम्भव नहीं हो पायेगा,लेकिन ये भी सच है कि हम एक दूसरे के बिना अधूरे हैं ।हम भविष्य में क्या करें और क्या नहीं ,,,,कुछ पता नहीं चलता क्योंकि किसी से राय भी तो नहीं ले सकते न ,,,बस सोचते रहते हैं,,,,,,यदि आपके पास कोई सुझाव हो तो अवश्य बताएं। .














एहसास दिल बंधन रूह

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