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Mother
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© Alka Agarwal

Inspirational

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माँ, मुझको अपने जैसा हूबहू आकार देना, 
माँ, मुझको अपने जैसे सारे संस्कार देना ।
माँ, कैसे तू एक से अनेक हो जाती है
दादी, दादा, पापा, भैया
और मुझमें ही खो जाती है।
तेरे चेहरे से निश्चल हंसी, 
नहीं हटती है पल भर को 
बिखरा-बिखरा, तिनका समेट कर
तू बनाती रहती है घर को 
माँ, मुझको भी अपने जैसा हूबहू कलाकार देना, 
माँ, मुझको अपने जैसे सारे संस्कार देना ।
देखती हूँ, मैं निश दिन, तू अपने बालों में
कंघी भी नहीं फिराती है
पापा, भैया को जगाने के लिये, 
उनके सिर में उंगलियां चलाती है
भागती है दिन भर इधर से उधर
हँसती और हँसाती है
होती है जरूरत तेरी जिसे घर में
खड़ी तू वहीं नज़र आती है
माँ, मुझको भी अपने जैसा हूबहू चमत्कार देना, 
माँ, मुझको अपने जैसे सारे संस्कार देना ।

#माँ

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