विवाह से डर कैसा
विवाह से डर कैसा
युववाणी कार्यक्रम में स्नेहा आपका स्वागत है। आज हम विवाह पर चर्चा करेंगें।
‘क्या आप विवाह से डरती/घबराती हैं?
‘हाँ, क्योंकि मुझे पहले अपना केरियर बनाना है।‘
‘यानी आप हाउस वाइफ नहीं बनना चाहती।‘
‘बिल्कुल नहीं निर्भरता दासत्व पैदा करती है मैं क्यों किसी की दास बनूँ? समानता, स्नेह और सम्मान हो तो साथ रहने का अपना आनंद है।’
‘माने आप पारंपरिक विवाह व्यवस्था के खिलाफ हैं।’
‘मैंने अपने पिता से कह दिया कि मुझे विवाह नहीं करना चाहे वो लड़का आइएस हो या डाक्टर। पहले मैं अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती हूँ।’
‘आपकी उम्र क्या है?’
‘मैंने 24 साल पार कर दिए हैं।‘
‘शादी के लिए यह सही उम्र है आपके पिता आपके लिए लड़का ढूँढ़ रहे हैं तो ठीक ही कर रहे हैं।’
‘पिता समाज के दबाब में है, ‘पराये धन’ को उसके हकदार को सौंपने की जल्दी में है।’’
‘आपके विचार क्रांतिकारी है ऐसे तो सामाजिक ताना-बाना छिन्न-भिन्न हो जायगा।’
‘लड़की को परिवार पर बोझ समझा जाता है। एक लायबिलिटी जिससे जितना जल्दी मुक्त हो उतना अच्छा है। लड़की, जिसे जिंदगी भर साथ रहना है उससे तो कुछ पूछा ही नहीं जा रहा है।
‘लगता है आप स्त्रीवादी हैं।’
‘स्त्री के हक की बात करना स्त्रीवादी होना है तो मैं स्त्रीवादी हूँ।’
‘फिर भी पिता तो आपके लिए लड़का ढूँढ़ रहे होंगे ?’
‘ढूँढ़ क्या रहे हैं उन्होंने तय कर दिया है।‘
‘फिर तो आपके लिए मुश्किल घड़ी है।‘
‘मेरे पिता और कुछ रिश्तेदार लड़के और उसके परिवार से मिलने गए जिसे मेरे लिए चुना था लेकिन मामला दहेज पर अटक गया। पिता 7 लाख से ज्यादा देने को तैयार नहीं थे। और वे 12 लाख मांग रहे थे आखिर में 10 लाख में फाइनल हुआ।’
‘तो अब आप क्या करेगी ? अब तो आपकी सगाई हो जायगी।‘
‘मैं इस सिचूऐशन से बाहर निकलना चाहती थी तो मैंने घर से भागने का निश्चय किया।’
‘तो फिर...’
‘लड़का पिता से सगाई के पहले एक बार मिलना चाहता था, वह दो लाख और बढ़ाने की बात कर रहा था। मेरे मामा ने कहा कि इसे छोड़ो हम इससे बेहतर लड़का ढूँढ़ लेंगे। इस तरह इस जाल में फँसने से बच गई।’
‘इस तरह आपकी कहानी का अंत सुखद रहा।’
‘बाद में लड़के के पिता ने खूब माफी मांगी लेकिन बात बनी नहीं जो चाहती थी वह हो गया सगाई कैन्सल हो गई। लेकिन मेरे पिता महीने भर बाद फिर मेरे लिए सही लड़का ढूँढ़ रहे थे।’
‘धन्यवाद स्नेहा जी, अपनी वार्ता (साक्षात्कार) बड़ी रोचक रही और समाज के सामने कई प्रश्न खड़ी कर गई।’
‘धन्यवाद आपका भी।’
