परमवीर चक्र
परमवीर चक्र
नायक जादुनाथ सिंह
हम सब ये जाते हैं की भारत की पवित्र भूमि को शुरूआत से ही वीरों की भूमि के रूप में जाना जाता है। आपने कहीं वीर पुरुष की कहानी सुनी होगी तो आज हम एक और महान पुरुष की बात करेंगे।
तो ये कहानी है उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर के खजूरी गाव के नायक जदुनाथ सिंह की उनका जन्म 21 नवंबर 1916 को एक मध्यम वर्ग के परिवार में हुआ बचपन से ही उन्हें पहलवानी मैं ज्यादा दिलचस्पी थी।
पहलवानी के अलावा बचपन से ही उनका एक सपना था देश की सेवा के लिए सेना में जुड़ना। इस सपने को पूरा करने के लिए 1941 मैं ब्रिटिश भारतीय सेना से वो जुड़ गए। एक साल के अंदर ही उन्हें दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश और से जापान के खिलाफ युद्ध के लिए भेजा गया। उनके अच्छे प्रदर्शन से खुश हो कर उन्हें नायक का पद सौंपा गया।
1947 के समय जादूनाथ सिंह राजपूत रेजिमेंट के अंदर एक नायक के पोस्ट पर थे।
भारत पाकिस्तान युद्ध 1947 के अंतर्गत 24 दिसंबर 1947 को पाकिस्तानी सेना ने नौशेरा पोस्ट पर कब्जा कर लिया नौशेरा एक रणनीतिक लोकेशन वाली पोस्ट थी जो मीरपुर और पुंछ की कम्युनिकेशन लाइन को कंट्रोल हुआ करती थी। यह भारत का नियंत्रण होना जरूरी था रक्षा मंत्रालय के द्वारा यह कार्य 7वी राजपूत रेजिमेंट को सौंपा गया जदुनाथ सिंह इसी रेजिमेंट का हिस्सा हुआ करते थे।
उस समय युद्ध मैं भारत पाकिस्तान पर हावी हो रहा था इसी का बदला लेने के लिए पाकिस्तान सेना ने नौशेरा सेक्टर के तान धार पोस्ट पर हमला किया जहां नायक जदुनाथ सिंह की टीम तैनात थी। जादुनाथ सिंह की टीम के सभी सदस्य हमलों वीर गति को प्राप्त हो गए। फिर भी जादुनाथ सिंह ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारी को सूचना दी सेना से मदद आती उससे पहले ही जादुनाथ सिंह की पोस्ट पर फिर से और पहले से ज्यादा खतरनाक हमला हुआ, जादूनाथ सिंह को पता था की ये पोस्ट भारत के लिए कितनी जरूरी है उन्होंने पूरे साहस से पाकिस्तानी सैनिकों की गोलियों का सामना किया आखिर 2 गोली उनके सीने में लगी और वो शहीद हुए।
जादूनाथ सिंह ने आखिर तक हार नहीं मानी उनके शहीद होने के तुरंत बाद भारतीय सेना की मदद आ गई और तन धार पोस्ट पाकिस्तान कंट्रोल में आने से बच गई। इसका पूरा श्रेय जादूनाथ सिंह को जाता है इसी के लिए भारत सरकार ने उन्हें 6 फरवरी 1948 इस योगदान के लिए भारत का सबसे बड़ा सेना पदक परम वीर चक्र इनायत किया है और ऐसे हमें हमारे दूसरे परम वीर चक्र नायक जादुनाथ सिंह मिले।
