प्रार्थना
प्रार्थना
रविवार के दिन सुबह सुबह रिया अपनी तोतली ज़ुबान से आँखे बन्द करके प्रार्थना कर रही थी। थैंग यू गाड फार द वर्ल्ड सो स्वीत ( Thank you God for the world so sweet)दादी माँ ने देखा और मुस्कुराते हुए कहा रिया, इसका मतलब क्या है?रिया सकपका गई औऱ बोली,"पता नहीं दादी माँ।टीचर ने सिखाया था। स्कूल में यही प्रार्थना होती है।"
अच्छा, दादी माँ ने कहा,"क्या तुम्हें खुशी मिलती हैं?"
ओह!दादी माँ मैं तो याद कर रही थी ।रिया इठलाते हुए बोली।नही,तो टीचर की पनिशमेंट मिलेंगी।
वह तो ठीक है।अच्छा चलो मैं तुम्हें प्रार्थना सिखाती हूँ और दादी माँ गुनगुनाते हुए रिया से पंक्तियां दोहराने के लिए कहती है-इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो न ********
रिया भी गुनगुनाती है और उसका चेहरा खिल उठता है और दादी माँ से पूछती है,"दादी माँ इसमें ऐसा क्या जादू है"
दादी ने अपनी गोद में रिया को दुलराते हुए समझाती है।बेटा, यह हमारे मन की भाषा है।मनुष्य जिस परिवेश में जन्म लेता है औऱ जिस भाषा में वह बोलना सीखता है, उसको दिल से महसूस करता है।
"तो फिर टीचर ऐसी प्रार्थना क्यों सिखाती है"रिया के माथे में बल पड़ गए।दादी ने कहा,"बेटा अंग्रेज तो चले गए, पर हम भारतीयों को मानसिक गुलाम बना गए।जो अंग्रेजी न बोले तो उसे कम पढ़ा लिखा समझते हैं।
रिया ने पूछा," ऐसा क्यों दादी माँ?"
दादी माँ अफ़सोस जताते हुए कहती हैं, क्या बताऊँ बेटा?हम भारतीयों को आज तक समझ नहीं आया कि शेर की खाल पहनकर कोई शेर नहीं बनता है।हम जैसे है वैसे ही अच्छे हैं।तभी हमारी सभ्यता है ,तभी हमारी संस्कृति है।बेटा सच बात तो यह है कि दूसरों की अच्छाइयां तो समेटो लेकिन अपने वसूलों की कदर करो तभी हमारा वजूद बचेगा।
रिया-अच्छा, मेरी प्यारी दादी माँ औऱ खिलखिलाती हुई बाहर चली जाती हैं। हाँ दादी माँ दोस्तों को जरूर बताऊँगी।
