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ved prakash mishra

Comedy

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ved prakash mishra

Comedy

फेसबुकिया काव्यगोष्ठी

फेसबुकिया काव्यगोष्ठी

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लॉकडाउन में कोमल कवि ह्रदय टूट टूट कर बिखर गए मासूम कवि काव्य गोष्ठियों के सुख से वंचित अपने घर के दूसरे सदस्यों पर दिन दिन भर चिड़चिड़ करते रहते पर घर के सदस्य समझ नहीं पाते कि यह शख्स जो सुबह से रात तक कोने में बैठा कोरे कागज कारे करता रहता था भूख प्यास पर भी जिसने विजय प्राप्त कर ली थी वो अचानक भूखे शेर की तरह क्यों बिहेव कर रहा है वह सत्य का पता लगाने में वे नाकाम रहे कि कवि जी को काव्य गोष्ठियों के गांव तकिए घटिया समोसे बासी मिठाइयां और फीकी की चाय की याद सता रही है आखिरकार जीवन भर कंप्यूटर टेक्नोलॉजी से दुश्मनी पाल रहे कवि चंद्रमुख (वास्तविक नाम नहीं )को एक सकारात्मक उपाय सूझा उन्होंने अपने सखा सूर्यमुख (वास्तविक नाम नहीं )को फोन लगाकर अपनी व साथी कवियों की व्यथा से अवगत कराया और लॉकडाउन में सोशल मीडिया का सहारा लेकर फेसबुक काव्य गोष्ठी करने का सुझाव दिया।

सूर्यमुख जी तुरंत मान गए और उन्होंने चंद्रमुख जी को बधाई देते हुए आश्वस्त किया कि लॉक डाउन में समस्त कवि साथियों के कलम की स्याही सूख रही है अधिक देर की तो उन में जंग लगना भी शुरू हो जाएगा इसलिए तुरंत इस सुझाव पर अमल किया जाएगा जिस कवि से सूर्यमुख जी ने संपर्क किया विदेह जी विराज जी मधु जी चंद्रिका जी( कोई भी वास्तविक नाम नहीं )सभी मान गए और आनन-फानन में दिनांक निश्चित कर फेसबुक काव्य गोष्ठी का आयोजन तय किया गया उस दिन चंद्रमुख जी के चेहरे पर विचित्र तेज था। 

सुबह जल्दी उठ कर नहाए छिटवाला कुर्ता पहना स्प्रे किया मोबाइल का स्क्रीन सेनेटाइज़ किया और घरवालों को डिस्टर्ब ना करने की हिदायत देकर अपनी चिकने कवर वाली डायरी लेकर दीवान पर जम गए उधर से सूर्य मुख जी का मैसेज लैंडलाइन पर आया फेसबुक पर आ जाओ चंद्रमुख जी ने मोबाइल पर फेसबुक लॉगिन किया पर नहीं हुआ कई बार प्रयास किए फिर पसीना पसीना हो कर बेटे को आवाज दी टिंकू जरा देख फेसबुक क्यों नहीं चल रहा टिंकू उनकी आवाज के दर्द को भापकर तोड़कर आया पल भर में ही उसने मोबाइल अपने पिता के हाथ में थमा दिया और बोला पापा नेट खत्म हो गया है रिचार्ज करवाना पड़ेगा।

चंद्रमुख जी दीवान पर निढाल होकर गिर पड़े लॉकडाउन में दुकानें बंद है मतलब ये काव्यगोष्ठी उनके बगैर सम्पन्न होगी साले विदेह और विराज जी दो दो कविताएं सुनाएंगे और बाद में चटकारे लेकर उनके मजे लेंगे हो सकता है स्थानीय अखबार में भी खबर छपवा दे।

बुरा हो रे तेरा कोरोना तुझे कवियों का भी श्राप लगेगा।


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