sachin kothiyal

Tragedy


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Tragedy


पहाड़ों के धरातल पर

पहाड़ों के धरातल पर

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दादी की बूढ़ी आंख्यों में आज कुछ चमक सी थी। दादी का एक लड़का बचनु था जिसकी ब्वारी ( बहू ) सुनीता को प्रसव पीड़ा होनी शुरु हो गयी थी। वैसे तो घर में एक नाती(पोता) पहले से ही था पर दादी को नातनी( पोती) की बहुत चाह थी। दादी नातनी का रिश्ता भी अलग ही हुआ बुढ़ापे में दादी की दोस्त नातनी ही बनती है।

दादी ब्वारी का पूरा ख्याल रख रही थी। रात होते होते बात बिगड़ने लगी ब्वारी की तबियत लगातार खराब हो रही थी।

सबने मिलकर फैसला लिया कि हॉस्पिटल ले जाया जाये वैसे तो ज्यादातर बच्चे गांव की दाइयों के हाथों ही सकुशल जन्म लेते थे पर आज मामला बिगड़ता जा रहा था।

बेसिक हॉस्पिटल 6 km पैदल दूरी पर था। रात को कुर्सी पर डंडे बांध कर स्ट्रेचर बनाया गया। ले जाने के लिए 3 लोग तैयार किये गए और एक बचनु खुद था ही।

5km की पहाड़ी उतराई उतरते हुए अब 1 km सीधा रास्ता बचा था। बचनु भी बार बार जल्दी चलने को कहता। सुनीता की तबियत बिगड़ती जा रही थी। हॉस्पिटल पहुचने पर वहाँ मौजूद एक कंपोडर और नर्स ने हालात की गंभीरता समझते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल 45 km दूर था। गांव के किसी ड्राइवर को फ़ोन कर बुलाया गया। रात का वक्त पहाड़ी रास्ता खराब सड़क होने से जिला अस्पताल पहुंचने में 2 घण्टे लग गये। इधर सुनीता दर्द चीख रही थी।

जिला अस्पताल पहुंचने तक तबियत और बिगड़ चुकी थी सांसे हल्की होने लगी थी सो जिला अस्पताल वालों ने भी हाथ खड़े कर एम्बुलेन्स मुहैया करवा हायर सेंटर रेफर कर दिया जो 80 कम दूर था। उधर गांव में दादी भैसों को घास डालकर नाती को सुलाकर दरवाजे बंद कर दिये थे ऐसे मौकों पर बाघ सुअर का भी डर लगा रहता है। एक फ़ोन था घर में वो भी बचनु साथ ले गया अब हालचाल जानने का भी कोई साधन नही था।

4 बजे सुबह सुनीता को बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसकी आँखें पथरा चुकी थीं पर दर्द बेहोश होने नहीं दे रहा था। बचनु इधर से उधर घूम रहा था उसे तब अहसास हुआ कि वह इस ठंड में सिर्फ एक स्वेटर् के साथ ही आ गया। बचनु और उसके साथ आये लोगों ने चाय पीने का फैसला किया।

इधर दादी ने सुबह 2 टाइम की चाय पी ली थी उजाला हो चला था। दादी भैसों से दूध निकालकर नाती के लिए दूध गर्म कर रही थी आज दादी का मन किसी काम में नही लग रहा था पर दादी को डॉक्टरों पर पूरा विश्वास था। दादी ने गांव के एक लड़के को वह से गुजरते देखा तो अपने लड़के बचनु को फ़ोन करने के लिए कहा। लड़के ने बचनु को फोन मिलाया पर बचनु ने फ़ोन उठाया नहीं तो साथ में गये रैदु को फ़ोन किया गया रैदु ने डॉक्टर की ही भाषा में फ़ोन पर जवाब दिया कि जच्चा बच्चा को नही बचाया नहीं जा सका।

दादी किसी खुशखबरी की आस में फोन की तरफ देखती रही। पर दादी ने स्पीकर पर लगे फोन से आवाज सुन ली थी। 

दादी ने बड़ी धूम धाम से बचनु की शादी की थी बहू भी सर्व गुण संपन और बहुत ही सुंदर थी। दादी बहुत को बेटी ही मानती थी क्यूंकि दादा के जाने के 15 वर्ष बाद बहू के आने से ही घर में रौनक आयी थी।

दादी के होंठ अचानक ही सूख गया बूढ़ी आंखों में अब आँसू भी नही बचे थे। दादी कुछ न बोल पायी न रो पायी बस नाती को गले से लगाकर बैठी देखती रही आकाश को शायद दादा बुला रहे थे।

 


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