पेंशन की लाठी बुढ़ापे का सहारा
पेंशन की लाठी बुढ़ापे का सहारा
ये बात उन दिनों की है जब मेरा ट्रांसफर नया नया हुआ ही था वो भी मेरे गांव के पास में । तो मुझे यहां की भाषा और रहना सहन की परिचय की आवश्यकता ना थी। में ग्रामीण बैंक में पिछले 3 वर्ष से नौकरी कर रहा था लेकिन फिर भी बहुत से बाते ऐसी थी जिनसे में अनभिज्ञ था । हुआ यूं की यहां आते ही मैनेजर साब ने एक बुजुर्ग की शिकायत पहुंचाई कि उनको कोई परेशान न करे। मैंने भी सोचा कि ये बुजुर्ग कौन है तो उत्सुक हो गया। फिर वो एक दिन बुजुर्ग बैंक आए और बोले बताओ बेटा मेरी पेंशन आ गई क्या मैंने उनको देखा तो उनकी उम्र करीब 90 वर्ष रही होगी । मैंने बोला नहीं आई । वो काफी परेशान से दिखे और फिर चले गए । फिर मैंने पूछा उनके बारे में तो पता चला कि ये यहीं इसी गांव में अकेले रहते है इनको जो खाना पानी मिल जाता है उसी में मस्त रहते है । अपना जीवन कठिन है फिर भी ये आसानी से उसको जी रहे है और मस्त रहते है। कुछ दिनों बाद कोरोना काल आ गया और एक बार के लिए लॉकडाउन लग गया । सब कुछ बंद हो गया। पर ये महाशय फिर भी बैंक पहुंच गए और पूछा 1595 खाते में देखो पेंशन आई क्या । उनको बताया कि आ गई है दो महीनों की एक साथ । फिर क्या था वो बड़े खुश हुए और बोले आज तो मौज कर दी भगवान ने । फिर बोले अब कुछ दिन चाय और बीडी उधार में नहीं पीनी पड़ेगी । कुछ तो पेंशन से राहत मिली आजकल दुकानदार भी उधार देने में आनाकानी करते है । में उनको बोलता हूँ भाई मेरी जैसी पेंशन आएगी में सबसे पहले तुम्हारा ही हिसाब करूंगा। टाइम पे पेंशन आते रहे तो किसी की सुननी ना पड़े पर क्या करे बाबू जी सरकारी काम है देर से ही होते है। आप लोग ध्यान रखा करो बाबूजी लेट पेंशन आती है तो कितनी परेशान होती है हमें। हम स्टाफ में जब भी उनके बारे ने चर्चा करते तो बड़ा सीखने को मिलता की ये अकेले रहकर भी अपना जीवन कितना सरलता से जी रहे है और एक हम लोग है जो बहुत कुछ होते हुए भी खुश नहीं है और बात बात पे दुखी हो जाते है । सच ही कहा है किसी ने की आदमी की जितनी आवश्यकता कम होगी आदमी उतना ही खुश रहेगा।
