मेंढक का गणेश प्रेम
मेंढक का गणेश प्रेम
एक बार एक मेंढक और मेंढकी तालाब में साथ रहते थे। मेंढक गणेश जी का बहुत बड़ा भक्त था।वह हर रोज़ गणेश जी की पूजा करता था। वह कुछ काम न करता बस गणेश जी का नाम जपता रहता। मेंढकी उससे बहुत परेशान थी। एक दिन मेंढकी ने गणेश जी की मूर्ति छिपा दी।
मेंढक आया और गणेश जी की मूर्ती के बारे में पूछने लगा तो मेंढकी ने बोला की मुझे नहीं पता। एक दिन एक औरत उनके तालाब के पास आई और अपने मटके में पानी भरने लगी। जेसे ही उसने पानी भरा वेसे ही मेंढक और मेंढकी उसके मटके के अन्दर चले गए। घर जाकर उस औरत ने पानी गैस पर रख दिया मेंढक और मेंढकी भी साथ में जलने लगे। मेंढकी मेंढक को बोलने लगी की तुम तो गणेश जी के बहुत बड़े भक्त हो तो बोलो गणेश जी को की हमें बचाए I
मेंढक ने यह सुनकर गणेश जी का नाम जपना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद एक सांड आया और अपने दोनों सिंग मटके पर जा मारे और मटका ज़मीन पर गिर कर टूट गया और दोनों बच गए। मेंढकी ने घर जाकर गणेश जी की मूर्ति मेंढक को लोटा दी और उसने भी गणेश जी की पूजा करनी शुरू कर दी।
