मदर डे फादर डे
मदर डे फादर डे
मैं दरवाजे पर बैठा न्यूज़ पेपर पढ़ रहा था। ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी। तभी मेरे कानों में सादिक चाचा की आवाज आई। मैंने सलाम कर कुर्सी उनकी तरफ बढा दी। उन्होंने जवाब देकर कुर्सी पर बैठ गये।
तो मैने पुछा, चाचा आप इधर, कोई काम था क्या... मूझे ही बुला लेते।
उनका चेहरा मुर्झाया हुआ था और बिमार भी लग रहे थे। वो कूछ रुक कर बोले, बवा मेरे बेटे से मिले हो क्या।
मैने कहा चाचा मैं तो कल ही आया हूं मुंबई से उसका और मेरा इलाका अलग है। और मैने अम्मा को दो कप चाय बनाने के लिए कह दिया।
क्या बात है चाचा, बहुत परेशान लग रहे है कोई बात है क्या...
तो पहले तो वो खामोश रहे फिर बोले, क्या बोले बवा यह तो कलयुग है। अब तो बच्चे को माँ-बाप ही बोझ लगता है। उसकी माँ कब से बिमार है कितनी बार कॉल किया। अरे पैसा नहीं देता कम से कम खैरियत तो पुछ लेता। कौन सी हम उसकी प्रॉपर्टी माँग रहे थे। पहले तो कभी-कभी फ़ोन भी करता था।अब तो वो भी नहीं।
इतना कहकर खामोश हो गये। मेरी छूट्टी खतम हो गयी और मै काम पर वापस आ गया। रात को मैने सोने से पहले फेसबुक खोला तो सादिक चाचा के बेटे ने स्टेटस लगाया था हैप्पी मदर डे... आई लव यू मॉम... यू आर माय लाइफ ऐण्ड एवरीथिंग और एक चमचमाती सारी की फोटो भी थी। और निचे लिखा था। मॉम यह छोटा सा गिफ्ट आपके लिए... उसपर ढेर सारे लाइक और कमेंट भी थे। मैं रिश्ते का ऐसा छलावा देखकर दंग रह गया। जिसके माँ को दवा ना नसीब हो वो क्या करेगी सारी लेकर... यह कैसा मदर डे है यह कैसा फादर डे...
