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Aquib Neyaz

Drama

3  

Aquib Neyaz

Drama

बरसात... अब पिंकी

बरसात... अब पिंकी

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बरसात का मौसम था। सुबह से ही हल्की हल्की बरसात हो रही थी। मै खिडकी के पास बैठा बारिश के बूंदो को देख रहा था। मैने कहा, माँ आज अदरक वाली चाय और पकोडे बनाओ।


माँ ने कहा, अच्छा तो इस लिए छुट्टी लिए हो दफ्तर से। और हंस कर चली गई। तभी विमला चाय की कप और पकोडे लेकर आ गईं। मै खिडकी की तरफ देखकर चाय की चुस्की ले रहा था...


बरसात मे चाय पीने का अपना ही मज़ा है। मै देख ही रहा था तभी अचानक मेरी नज़र रुक गई। दूर बारिश की बूंदो के साथ एक लडकी खेलती हुए देखी।पता नही दूर से देखने मे ही अल्हड लग रही थी। उसने गुलाबी सुट पहन रखा था। उसकी भीगी हुई लटे उसके चेहरे पर झूल रहे थे। जिस से उसका चेहरा साफ नही दिख रहा था। पता नही उसको देख कर मेरे चेहरे पर हल्की हंसी आ गई तभी विमला चाय की कप लेने आई।


और ना चाहते हुए भी मै पुछ बैठा कोन है यह लडकी। उसने खिडकी से झांकते हुए कहा, अरे भैया यह तो हमारे पडाेस मे मेहता साहब है ना उनकी बहू की बहन है। उनकी बहू की डिलिवरी होने वाली है। इसलिए उसने अपने बहन को बुलाया, पिंकी नाम है। इसका बहुत बातूनी है। मै इसके यहा काम पर जाती हूं, मन की बहुत अच्छी है पर थोडी मेन्टल पिस है, वो हँसकर बोली।


मेहता साहब हमारे पडाेसी थे। वो हमारे गांव के जाने माने रईसों मे से एक थे। उनकी एक अलग ही हस्ती थी। जब उनके एकलाैते बेटे की शादी हुई तो हमने सूना की उनके समधि उनसे भी बडे रईस है।


मुझे ऑफ़िस जाना था। मै जल्दी जल्दी तैयार होकर घर से निकल रहा था। इस बरसात की वजह से मै पहले ही लेट हो चुका था। मै जल्दी जल्दी घर से निकाला तो मेरी नज़र पिंकी पर पडी वो बरसात के पानी मे बच्चो के साथ कागज के नाव बनाकर डाल रही थी। उसके अंदर बटपना और मासूमियत दोनो झलक रहे थे।


मै उसे ना चाहते हुए भी घूरने लगा। जिसे उसने शायद महसूस कर लिया। और मुझे देखने लगी। हम दोनो की नज़र पहली बार टकराई तो वो भी शरमा कर चली गई। और मै भी चला गया। मैने जल्दी जल्दी अपनी बाइक स्टार्ट कर अपने ऑफ़िस पहुँचा। और अपने कैबिन मे आकर बैठ गया। पता नही क्यों बार बार मेरे आँखो के सामने पिंकी का चेहरा आ जाता। मै ना चाहते हुए भी उसके खयालो मै डूब गया।


अब हम दोनो अक्सर ही टकरा जाते पर हमारी बाते नही होती। अब हम दोनो एक दुसरे को देखकर मुस्कुरा देते। हम दोनो के आंखाें मे एक दुसरे के लिए प्यार झलक रहा था। जिसे हम दोनो ने महसूस किया।


आज संडे था। मै अपने रुम की सफाई कर रहा था। तभी मेरी छोटी बहन ने कहा, पिंकी यह मेरे भैया है। मेरे भैया ने एमबीए किया है। पर है बहुत सरू। भैया यह पिंकी है। हमारी पडाेसी अरे मैने तो तुम्हे भैया का नाम बताया ही नही, मेरे भैया का नाम अमन है।


अब पिंकी मेरी बहन के साथ रोज घर आने लगी। और हमारे पडाेसी से हमारी दोस्ती हो गई। अब पिंकी कूछ ना कूछ लेकर मेरे घर अक्सर आने लगी। मै उसे घूर घूर कर देखता तो वो शरमा जाती। वो भी मूझे चोरी चोरी नजरो से देखती जैसे मै उसकी तरफ देखता वो नज़र घूमा लेती। मेरे प्यार को मेरी माँ ने भी महसूस कर लिया था...



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