माँ

माँ

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अरनव और खुशी की शादी की ये 7वी सालगीरह थी। खुशी और अरनव सुबह मंदिर जाते है। अब अरनव बदल गया है। वो खुशी के लिए कुछ भी करता है, तो मंदिर क्या ? वापस आने के बाद सब उसे बधाई देते है।

अरनव उस दिन घर में पार्टी रखता है। घर में सब महेमान आते है। हर तरफ हँसी खुशी का माहौल होता है। अरनव खुशी के लिए एक गाने पर उसके साथ नाचता भी है। और वो गाना था- "जब कोई बात बिगड़ जाएँ जब कोई मुश्किल पड़ जाएँ तुम देना साथ मेरा- " ये देखकर खुशी की तो आँखें भर जाती है। पर वही आँखें अरनव को इस बात का प्रोमिस भी करती है। खुशी अरनव को कहती है की उसके पास भी एक सरप्राइझ है पर वो उसे सबके सामने नहीं दे शकती वे बाद में उसके कमरे मे जाकर देगी।

अरनव चौंक जाता है की अब खुशी क्या नया तमाशा करने वाली है। कही वो कोई फिल्मी नाटक या गाना जैसे उसने पहले भी कई बार किया था। पर आखिर वो सोचता ही रह जाता है। सब लोग चले जाते है। अरनव खुशी को ईशारे में उपर कमरे में आने को कहता है। पर खुशी कहती है की सब्र कीजिए सब्र का फल मिठा होता है। पर वो कमर में चला जाता है। और खुशी को कहता है की वो फ्री हो जाये तो उपर आ जाये। अरनव रुम मे जाकर फ्रेश हो जाता है तभी उसके हाथ मे एक लिफाफा लग जाता है। वो उसे खोलकर देखता है। वो उसे देखकर दंग रह जाता है। तभी खुशी भी वहाँ आ जाती है अरनव के हाथ मे वो लिफाफा देखकर उसको गले लगा के कहती है की ये ही वो सरप्राइस था। जो आपको पहले ही मिल गया।

अरनव उस लिफाफे के साथ ऐसे ही खड़ा रहता है जैसे की वो शॉक में था। खुशी उसे पूछती है की क्या हुआ उसे ये जानकर नहीं हुई की वो माँ बनने वाली है? अरनव के हाथों से प्रेगनेंसी टेस्ट स्ट्रिप नीचे गीर जाती है और वो खुशी को दोनो हाथों से बड़े जोर से पकड़कर गुस्से से देखता है और कहता है की "ये सब क्या है खुशी ?" और तुमने मुझे ये बात पहले क्यो नहीं बताई? मैं ये बच्चा नहीं चाहता।

ये सुन के खुशी के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वो उसके हाथों से खुद को छुड़ा कर पूछती है की ये आप क्या कह रहे हो? आप होश में तो हो?

अरनव उसे प्यार से बताता है की वो इस बच्चे के बारे में अभी नहीं सोचता और अभी उसे ये नहीं चाहिए। खुशी और अरनव के बीच बहस हो जाती है। पर अरनव खुशी की कोई बात नहीं सुनता और अपना फैसला सुनाता है की या तो वो ये बच्चा गिरा दे या फिर इस घर से चली जाएँ। खुशी उसे कुछ कहने की और समझाने की कोशिश करती है पर वो उसकी एक नहीं सुनता और गुस्सा होकर वहाँ से चला जाता है।

खुशी वही पर शॉक में खड़ी थी और सोच रही थी की ये क्या हो रहा है ? और अरनव इस बच्चे को क्यो नहीं चाहता? वो ऐसा कैसे कर सकते है?

वो सोचती है की वो अरनव से इस बारे में बात करेगी। तभी अरनव वापस आकर उसे एक और झटका देता है की उसने डॉक्टर से बात कर ली है। और कल सुबह की अपॉइंटमेंट ले लिया है उसे कल ही अबोर्शन करवाना पड़ेगा ताकी घर में किसी को भी इस बारे में कोई बात पता न चले?

ये सुन के खुशी वही गिर पड़ती है और अरनव उसे उठाकर बेड पर सुलाता है। वो उसे होश में लाने की कोशिश करता है। वो डॉक्टर को फोन भी नहीं करता ये सोचकर की कही घर में सबको पता न चल जाएगा।

खुशी को होश आता है तो वो खुशी से कहता है की उसने जो तय किया है वो फाइनल है उसमे कोई चेंज नहीं होगा कल सुबह जाना है। खुशी इस बात को लेकर सारी रात सो नहीं पाती। और सुबह वो बुआ के घर चली जाती है। अरनव सुबह उठकर देखता है की खुशी वहां पर नहीं है। वो उसे पूरे घर में ढूँढता है पर वो नहीं मिलती उसने सबसे पूछा पर कहीं भी खुशी नहीं थी और किसी ने भी उसे नहीं देखा था। सब अरनव से पूछते है की तुम दोनो के बीच कोई झगड़ा तो नहीं हुआ? पर अरनव इस बात को मना कर देता है। तभी बुआ जी का फोन आता है वो अंजली से बात करती है की खुशी उसके घर पर आइ है पर आते ही वो अपने कमरे में लॉक हो गई है और कुछ कहती भी नही और बहुत परेशान लग रही थी क्या वहां रायजादा हाउस में कुछ हुआ है?

नानी अरनव से पूछती है की क्या हुआ है तो वो बात टाल देता है और कहता है की कुछ नहीं मैं जाके उसे लेकर आता हूँ। पर इस बार नानी और अंजली उसे मना कर देते है और वे दोनो खुद उसे लेने के लिए जाते है। तभी अरनव गुस्सा हो जाता है और वहां से चला जाता है। अंजली और नानी बहुत परेशान हो जाते है की ये दोनो के बीच ऐसी कौन सी बात हुई की खुशी इस तरह चली गई । जब वे दोनो खुशी से मिलती है तो खुशी उसे ये सारी बातें बताती है। नानी और अंजली इस बात से खुश हो जाती है की खुशी माँ बनने वाली है पर अरनव का फैसला ???

वो खुशी को मनाकर घर ले जाते है। घर पहुँचते ही नानी और अंजली अरनव पर गुस्सा करती है और कहती है की ये उसने क्या किया ये गलत है और वे दोनो उसे समजाते है और एसा फेसला क्यु किया ये पिछती है पर अरनव उसे कुछ नहीं बताता। नानी और अंजली को खुश देखकर अरनव अपने फैसले को बदल देता है और कहता है की वो इस बच्चे के लिए तैयार है। पर तभी खुशी उसे मना कर देती है और कहती है की ये बच्चा अब सिर्फ उसकी माँ का होगा इस पर किसी और का हक नहीं होगा। इस बच्चे के नाम के पीछे भी वो उसकी माँ का नाम ही लगायेगी। और एक बात की वो अब से अरनव के साथ एक कमरे में नहीं रहेगी, वो अंजली के साथ उसके कमरे में रहेगी। वो अरनव को उसके इस बार के बर्ताव से उसे माफ़ नहीं करेगी और वो इस घर में वापस इस लिए आइ है की इस घर की इज़्ज़्त कम न हो। पर अगर किसी को उसके इस फैसले से परेशानी है तो वो यहाँ नहीं रहेगी ।

सब लोग उसकी इस बात से सहमत हो जाते है। पर अरनव गुस्सा हो जाता है की खुशी ये सब ठीक नहीं कर रही वो अंजली को क्यो परेशान कर रही है? वो सोचता हैं कि अंजली के साथ जो हुआ उसके बाद फिर से माँ बनना और उसके बारे मे सोचना भी उसके लिए मुश्किल बात थी और खुशी अंजली के कमरे में रहेगी तो उसे सब कुछ याद आयेगा वो ये सही नहीं कर रही है। पर खुशी की बात अंजली मान जाती है।


अंजली खुशी के खाने पीने से लेकर हर तरह से उसका खयाल रखती है। उसके चेक अप और दवाईयाँ सब अंजली करती थी। वो उसके हर तरह से खुश रखती है। पूरा दिन दोनो साथ में रहते थे पर एक बात थी अब खुशी खामोश हो गई थी हर वक्त बस वो अंजली से बातें सुनती और उन्हीं की तरह काम करती और शांत रहती थी। इन सबके बीच में कहीं ना कहीं वो अरनव को और अरनव उसको काफी मिस करते थे। खुशी बिना कहे बिना उससे बात किये उसका ख्याल रखती थी जैसे की उसकी दवाईयाँ उसके खाने और कपड़े सब काम करती थी पर अरनव से बात नहीं करती थी।

उस और अरनव भी खुशी के खाने से लेकर उसकी हर बात के बारे में खबर रखता और अंजली से कहता की जरुरत हो तो उसे कह दे बे खुशी को कुछ न होने दे।

 

अरनव अंजली और नानी से माफ़ी मांगता है की उसने जो किया वो गलत था पर खुशी को वो कैसे मनाए? नानी समझाती है की थोड़ा वक्त दो सब ठीक हो जायेगा। अंजली खुशी को काफी सारी बातें समझाती है की ये करे ये न करे खुशी उसकी हर बात मानती है। पर अंजली जब उससे अरनव के बारे में बात करती है तो वो चिढ़ जाती है और इस बारे में बात करने से मना कर देती है। अंजली को बुरा लगता है की खुशी मान ही नहीं रही जब की इस वक्त उसे सबसे ज्यादा जरुरत उसकी ही है। खुशी कहती है की वो इस बच्चे पर अरनव का साया भी नहीं पड़ने देगी। वो उसे उसके जैसा नहीं बनाना चाहती गुस्सेवाला..... बल्कि बिलकुल अंजली की तरह शांत हो। अरनव हर रात को खुशी को देखने के लिए आता है की वो ठीक है या नहीं पर तब जब वो सो जाती है। खुशी भी उस वक्त जगी हुई होते हुए भी सोने का नाटक करती है। अरनव उसे धीरे से छू कर चला जाता है। धीरे धीरे समय बीतता जाता है और फिर खुशी की गोद भराई होती है। अरनव और खुशी इस वक्त करीब होते है पर जताते नहीं उनके बीच काफी सारी यादें वापस आती है पर वो फिर भी दूर ही रहते है।अरनव की लाख कोशिश के बावजूद भी खुशी नहीं मानी।


एक रात खुशी और अंजली बात कर रहे थे। तभी अंजली को उनकी सारी बातें याद आती है उसकी गोद भराई के दिन ही उसके साथ हादसा हुआ और उसने उसकी राजकुमारी खो दी। इतना बोलकर वो रोने लगी। तभी खुशी उसे सम्भालने आगे बढ़ी पर तभी अंजली के मुँह से राजकुमारी निकला और खुशी वही रुक जाती है। और थोड़ा सा चिल्लाती है। अंजली को लगा की खुशी को कुछ हुआ है तो वो उठकर उसके पास जाती है पर खुशी बेचैन थी की क्या हुआ उसे वो कुछ समझ नहीं पाई। खुशी ने अंजली को बताया की उसे यहाँ पर कुछ लगा पर क्या ये पता नही? अंजली ने उसे बताया की जब बच्चा पेट मे लात मारता है तो ऐसा लगता है ।

अंजली बताती है की जब बच्चा बहारी दुनिया से जुड़ता है तो किसी कि आवाज़ सुन के या उसके छूने से वो ऐसे करता है। खुशी समझ गई की कहीं ये लात अंजली के लिए तो नहीं ? वो फिर से बातों बातों मे अंजली से राजकुमारी नाम बुलवाती है और फिर से लात महसूस होती है। फिर वो अंजली का हाथ लेकर उसे ये महसूस करवाती है की ये बच्चा आपकी आवाज़ सुनकर लात मारता है। अंजली और खुशी इस बात से हैरान रह जाते है। अंजली तो खुशी से रो पड़ती है।

दूसरे दिन सुबह अंजली अरनव के कमरे में जाती है और सोचती है की अरनव को भी ये सब महसूस करना चाहिए वो इन सब से दूर क्यो रहे? जब की उसका हक़ बनता है पर क्या खुशी उसे ऐसा करने देगी? तभी अरनव अंजली को देखकर पूछता है की क्या हुआ? तो अंजली उसे कहती है की आज रात को खुशी के सो जाने के बाद वो कमरे में उनसे मिलने आयेगा। अरनव को कुछ समझ नहीं आता पर वो अंजली की बात मानता है। और रात को अंजली के कहने पर वो कमरे में जाता है। अंजली उसे इशारे से खुशी के पास बैठने को कहती है। अरनव को कुछ समझ नहीं आता कि अंजली क्या कर रही है वो उसे बिलकुल चुप रहने को कहती है उसे इशारे से कहती है की वो अपना हाथ उस बच्चे पर रखे। पर अरनव कुछ समझ नहीं पाता तो अंजली उसका हाथ पकड़कर रखती है और धीरे से बोलती है राजकुमारी तभी अरनव के हाथ में एक छोटी से लात महसूस होती है अंजली फिर से बोलती है राजकुमारी और फिर वही लात!

अरनव कुछ समझ नहीं पाता ये क्या हो रहा है? तभी अंजली उसे जल्दी से कमरे से बहार ले जाती है और दरवाज़ा बंद कर देती है। पर खुशी जाग रही होती है उसे ये सब अच्छा लगता है और बहार अरनव अभी भी उस सब से हैरान था। अंजली अरनव को उसके कमरे में ले जाती है और बड़ी खुश होकर कहती है की उसे लगता है की वो फिर से माँ बननेवाली है वो सारी चीज़े उसे फिर से जीने को मिली इस बच्चे ने उसे सारी यादें फिर से याद दिला दी ये सब महसूस करके उसे कैसा लग रहा है वो बयाँ नहीं कर सकती। और जब भी वो राजकुमारी बोलती है और वो बच्चा लात मरता है ऐसे लगता है जैसे की वो उसी की गोद में हो और वो उसे पाल रही हो।

तुम्हारी और खुशी की वजह से हमे फिर से वो सबकुछ करने को मिला फिर से हमे माँ होने का अहसास हुआ उसके लिए थैंक यू

अरनव शॉक में था की दि कितनी खुश थी उसने नहीं सोचा था की दी इतनी खुश हो जायेगी। दि उसको गले लगाकर उसके माथे को चुमकर चली गई ।

अंजली के चहरे पर खुशी देखकर अरनव सोचता है की खुशी क्या करना चाहती थी उसे खुशी की सोच दूसरी नजर से देखकर समझ आया की खुशी क्या करना चाहती थी। वो दौड़कर खुशी के कमरे में गया पर तभी खुशी को पैन हो रहा था और वो दर्द से तड़प रही थी। अरनव चिल्लता है “ खुशी....” उसकी आवाज़ सुनके सब लोग आ जाते है। अरनव खुशी को अपनी बांहों में उठाकर अस्पताल की और निकलता है तभी खुशी उसे पूछती है की दि कहां है?

तभी अंजली और नानी वहां आते है और खुशी की हालत देखकर समझ जाते है की ये उसका दर्द क्यो है ? पर अरनव खुशी की हालत से ज्यादा परेशान था तो नानी और दि ने उसे समझाया और सब अस्पताल गये।

अस्पताल पहुँचने तक खुशी ने अंजली का हाथ नहीं छोड़ा अरनव समझ गया था की क्या है , ये सब पर बाकी सब को ये बात थोड़ी अजब लगी।

नानी और अंजली भगवान से प्रार्थना करते है की ये बच्चा अरनव और खुशी को वापस साथ ले आये। थोड़ी देर के बाद डॉक्टर ने उसे खुश खबर सुनाई की बेटी हुई है। तभी अंजली के मुँह से निकल गया जैसे “राजकुमारी” अरनव उसकी और देखता है की वो कितनी खुश थी वो बस उसे देखता ही रह जाता है ।

तभी डॉक्टर सबको खुशी से मिलने की इजाज़त दे देते है। और बच्चे को थोड़ी देर के बाद आपको सोंपा जायेगा। सब खुशी के पास जाते है। पर अरनव ?

थोड़ी देर के बाद अरनव अंदर आता है उसका चेहरा पूरा रो रो कर बुरा बन गया था वो आते ही खुशी को गले लगाकर वापस रोने लगा और माफ़ मांगी

आई ऍम सॉरी खुशी मैंने वापस तुम्हें समझने में ग़लती कर दी। मैं नहीं जानता था की तुम क्या करना चाहती थी और मैंने बस अपनी मनमानी करता रहा। और तुम्हें कितनी तकलीफ़ दी पर तुमने वो किया है जिसके बारे में मैं कभी सोच भी नही सकता था, आई ऍम प्राउड ऑफ़ यू ख़ुशी प्लीज मुझे माफ़ कर दो। मैं तुम्हें समझ ही नहीं पाया। खुशी अरनव के आँसू पोछती है और मुस्उकुरा के उसे गले लगा लेती है।

तभी कमरे में एक नर्स बच्ची को लेकर आती है। सब उसका चेहरा देखने के लिए आगे बढ़ते है तभी खुशी सबको रोक देती है। सब लोग चौंक जाते है। तभी अरनव कहता है की इस बच्ची पर सबसे पहला हक सिर्फ उसकी माँ का है, है ना खुशी?

खुशी कुछ बोलना चाहती थी पर अरनव ने उसे बोलने का मौका ही नहीं दिया और खुद ही कहने लगा की, ये बच्ची को आप उसकी माँ के हाथों मे ही दीजिए। सबकी नजर खुशी पर जाकर टिक गई पर नर्स सीधे उस बच्ची को लेकर अंजली के पास गई। तभी अरनव ने कहां की इस राजकुमारी पर सिर्फ उसकी अंजली माँ का ही हक है। ये सुन के सब हैरान थे और खुशी भी .....

अंजली ने बच्ची को जब अपनी गोद में लिया तो वो कुछ बोल ही नहीं पायी ...

अरनव ने कहा की दि खुशी ने जो किया वो सब आपको आपकी राजकुमारी लौटाने के लिए किया आपको माँ का दर्जा देने के लिए ......

खुशी अरनव की और देख रही थी सबकी आंकें भर आइ और खुशी समझ गई की अरनव उसके फैसले के बारे में समझ गया है। अंजली भी रो पड़ी उसे अरनव ने सम्भाला और उसे बच्ची के साथ खुशी के पार बेड पर बिठाया। अंजली कुछ कहना चाहती थी पर कुछ कह नहीं पाई। और खुशी सब समझ गई । खुशी बोल पड़ी की आपको वादा किया था की हम आपको आपकी राजकुमारी वापस ज़रूर लौटायेंगे बस वही वादा पूरा कर रहे है।



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