Denju Pankaj

Drama


4.5  

Denju Pankaj

Drama


इस प्यार को क्या नाम दूँ ?

इस प्यार को क्या नाम दूँ ?

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खुशी ने जब अपना मिस इंडिया का खिताब जीत लिया था तो वह सबसे ज्यादा खुश थी, दूसरी खुशी उसे तब मिली जब उसको आरव ने माँ कहना शुरू किया था। दूसरे दिन सुबह से उसकी नई कहानी शुरू होती है सुबह उठ के सब के लिए नाश्ता बनाती है फिर से वह आरव और अरनव के साथ अपनी नई जिंदगी जीने के लिए तैयार हो जाती है। अब से खुशी के पास दो काम थे, एक अरनव के साथ लड़ाई झगड़ा और दूसरा आरव के साथ खेलना कूदना

खुशी आरव के साथ खेलने जाती है वे दोनों बास्केटबॉल खेलते हैं, तभी बाल एक गैराज के पास जाकर टकराती है। खुशी अपने नौकरों से पूछती है कि "उसमें क्या है?" एक नौकर बताता है कि उसमें एक बाइक है वह अरनव भैया का है। यह जानकर खुशी को ताज्जुब होता है कि वह अरनव का बाइक है उसे इस बारे में कुछ पता क्यों नहीं है। यह जानना चाहती है इस बाइक के बारे में अरनव ने उसे कुछ भी कभी भी क्यों नहीं बताया और वह यह बाइक कभी चलाते क्यों नहीं इस बाइक को इस तरह से बंद करके क्यों रखा है ?


खुशी बेचैन थी यह जानने के लिए इस बारे में उसे पता क्यों नहीं है वह अंजलि के पास जाती है उसे पूछने कि यह बाइक का क्या चक्कर है पर उसे लगता है कि इस बारे में किसी से कुछ पूछना नहीं चाहिए। वह कुछ सोचती हुई अरनव से जाकर टकराती है अरनव उसे संभालता है और उससे पूछता है कि "क्या हुआ क्या सोच रही हो" पर खुशी कुछ नहीं बोलती और वहां से चली जाती है। पर अरनव यह समझ जाता है कि वह किसी बात को लेकर परेशान है कुछ सोच रही है तो कोई बात नहीं बाद में बात करेंगे। वैसे खुशी इस बारे में खुद पता लगाना चाहती है क्यों उन्होंने उसे इस बारे में कोई भी बात नहीं की वह सोचती है कि यह शायद उसके पापा की हो या फिर कुछ और बात हो वरना कोई इस तरह बाइक को बंद करके रखना क्यों चाहेगा इसके पीछे क्या राज है।

दूसरे दिन सुबह खुशी जल्दी से उठ कर गैराज की ओर चलती है, उसे लगता है कि वह बाइक अब तक जंक खाकर खराब हो चुकी होगी तो वह तो भंगार जैसी बन गई होगी पर तभी अरनव भी उस ओर जोगिंग करता हुआ नजर आता है और खुशी रुक जाती है उसे वहां देखकर वहां छिप जाती है और देखती है कि उसको अरनव खोलता है। अरे यह बाइक एकदम नया और बिना जंग लगा हुआ ऐसा लग रहा था मानो अभी अभी किसी ने नया ख़रीदा हो यह ऐसे क्यों है यहां पर बंद, उन्होंने उसे हाथ लगाया पर हाथ लगाते ही वो चौक गया फिर धीरे से उसने इस बाइक को चालू किया और फिर गैराज बंद करके चला गया। खुशी यह सब देख हैरान रह जाती है अरनव ने इस बाइक के बारे में उससे कभी कुछ भी नहीं कहा और इस नई बाइक को कौन सी सजा दी है उसे इस तरह बंद करके रखा है। खुशी बार-बार यह सोच रही है कि उसकी पिछली सीट पर हाथ रख कर उन्होंने ऐसा महसूस किया जैसे वहां से कोई गिर गया हो और फिर उसके हाथ से छूट गया हो खुशी बेचैन हो रही थी यह क्या राज है? उसकी बेचैनी उसके चेहरे पर साफ नजर आ रही थी अंजलि ने उसे पूछा कि क्या हुआ और खुशी कुछ बोल नहीं पाई। उसके पास इस बात को बताने का कोई कारण नहीं था, उस दिन रात को भी वह ठीक से सो नहीं पाई वह उस राज के बारे में जाने के लिए बेताब थी पर क्या करे किससे पूछे? फिर वह इस बात को ऐसे ही छोड़ देना चाहती थी उसे लगा कि शायद उसे इस बारे में किसी को कुछ पूछना नहीं चाहिए वह यह बात करके किसी को परेशान नहीं करना चाहती थी।

कुछ दिनों के बाद आरव के साथ खुशी एक प्रोजेक्ट बना रही थी जिसमें बाइक का पिक्चर लगाना था वहां पर पड़ी एक पिक्चर को देखकर अंजलि हैरान हो गई मानो उसके चेहरे का रंग उड़ गया हो। खुशी अंजलि का यह चेहरा देख समझ जाती है, उसकी हिम्मत नहीं होती पूछने की कि क्या हुआ वह अंजलि को उसके कमरे में ले जाती है और उसे आराम करने को कहती है, पर अंजलि आखिरकार रो देती है और खुशी का हाथ पकड़कर उसे बाइक के बारे में सब कुछ बता देती है।

वह कहती है कि अरनव को यह बाइक उसके पापा ने ख़रीद कर दिया था, पर जब तक उसका लाइसेंस नहीं मिल जाता उसे चलाने मना किया था, पर अरनव कहां मानने वाला था वह हर रोज़ रात को अपने दोस्तों के साथ इस बाइक को लेकर निकल पड़ता था। एक दिन अंजलि को पता चला तो उसने अरनव के साथ जाने की जीद की और कहा कि अगर नहीं ले जाओगे तो पापा को बता दूंगी। अब अरनव बेचारा क्या करता वह अपने दि की बात नहीं टालता था वह उसे लेकर गया और उन दोनों का एक्सीडेंट हो गया। बस तब से अंजलि के पैर में वह शूज लगा है और अरनव इस बात को लेकर अपने आप को कोसता रहता है कि यह सब उनकी वजह से हुआ, अंजलि खुशी को बताती है यह सच नहीं है ग़लती उसकी थी उसका एक रुमाल बाइक के पहिए में फँस जाता है और इस वजह से एक्सीडेंट हो जाता है, जबकि छोटे को यह लगता है कि यह सब उसकी वजह से हुआ है वह आज भी अपने आप को माफ़ नहीं कर पाया। अंजलि ने कई बार छोटे से बात करने की कोशिश की पर हर बार वह खुद को ही जिम्मेदार मानता है, अंजलि खुशी को कहती है कि छोटे को यह बात अंदर ही अंदर खाए जा रही है, तुम उसे जाकर यह बताओ कि जो कुछ भी हुआ है उसमें उसकी कोई ग़लती नहीं है उसको इस गिल्टी से निकालो जो होना था सो हो चुका और सब कुछ भूल जाओ। छोटे आज भी वो बाइक नहीं चलाता क्योंकि उसे लगता है कि यह सब कुछ उनकी वजह से हुआ है उस बाइक को को छूते ही उसे सब कुछ याद आ जाता है।

अंजलि चाहती है कि खुशी इस तकलीफ़ से छोटे को निकाले और उसे समझाए यह एक हादसा था और सब बीती बातें भूल कर फिर से उसे वह बाइक चलानी चाहिए, अंजलि उसके साथ उसी बाइक पर बैठकर लॉन्ग ड्राइव पर जाना चाहती है ,खुशी अंजलि को प्रॉमिस करती है कि वह अरनव से बात करेगी और ऐसा ज़रूर होगा अरनव उसे घुमाने ने उसे बाइक पर ज़रूर ले जाएगा।


अरनव जब घर वापस आता है तो शाम को उसके पास एक सरप्राइज़ होता है आरो के लिए, वह उसे पढ़ाई करने के लिए बाहर भेजना चाहता है। आरो इस बात को लेकर खुश था सब घर वाले भी इस बात को लेकर खुश थे पर खुशी को यह बात अच्छी नहीं लगी कि आरोप अकेला पढ़ाई करने के लिए सबसे दूर कैसे रह सकता है, प्रणव ने उसे समझाया कि आरो के लिए क्या सही है और क्या गलत है और वह उसे क्यों वहां पर भेजना चाहता है ,फिर खुशी मान गई पर अभी भी उसके मन में वह बाइक को लेकर सवाल थे, कि क्या करें और कैसे बात करें तभी उसे याद आया कि क्यों ना वह आरव से ही उस बाइक को बाहर निकाल कर उसको चलाने के ज़िद करवाए।

फिर वह आरव से कहती है कि "क्या तुम अपने पापा के साथ यह बाकी के थोड़े दिन मौज़ मस्ती नहीं करना चाहते" तो आरव भी यही सोचा था कि वह अरनव के साथ बास्केटबॉल खेले पूरा दिन उसके साथ रहे, अरनव भी इस बात को लेकर मान जाता है और वह सब बैकयार्ड में बास्केटबॉल खेलने चले जाते हैं।

खुशी कैसे भी करके बॉल को गैराज के पास डालती है और आरव को बताती है कि उसके पीछे क्या है। यह जानने आरव अरनव से कहता है कि उसे खोलकर दिखाइए अरनव गुस्सा हो कर चला जाता है, कभी खुशी मौका पाकर अरनव को यह समझाती है कि उसकी एक छोटी सी विश पूरी कर देनी चाहिए और वैसे भी वह कुछ दिनों में यहां से चला जाएगा तो उसको कहीं बुरा लग जाएगा, आप उसके लिए इतना भी नहीं कर सकते और उस गैराज में ऐसा क्या है जो आप उस पर इतना गुस्सा हो गए कि उसे दिखा भी नहीं सकते।

अरनव अपना वह एक्सीडेंट याद करके फिर से गुस्सा हो जाता है और खुशी के सामने सब कुछ कह कर वह रोने लगता है, वह सोचता है कि इस हालत का वही जिम्मेदार है फिर खुशी उसे समझाती है कि हालात कितने भी कठिन क्यों ना हो समय वह घाव भर देता है।

अरनव खुशी की बातों को समझ कर दूसरे दिन आरव को लेकर गैराज के पास जाता है और उसे खोल कर वह बाइक दिखाता है, बाइक को देखकर उस पर सवार होने के लिए कहता है पर खुशी उसे रोकती है तभी अरनव उसे लेकर बाइक चलाता है और अपने गिल्टी को फेस करता है, उसके चेहरे पर हिम्मत और खुशी देखकर खुशी को बहुत अच्छा लगता है। पर तभी बाइक की आवाज़ सुनकर सब लोग बाहर आ जाते हैं और अरनव को बाइक चलाता हुआ देख सब लोग चौक जाते हैं। अंजलि खुश होकर रोने लगती है और अरनव के पास जाकर फिर से उसी बाइक पर सवार होने के लिए कहती है। अरनव भी उसे बड़ी हिम्मत के साथ बिठाकर एक लॉन्ग ड्राइव पर निकलता है और सबके चेहरे पर खुशी ही खुशी छा जाती है।


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