खुदा का खौफ
खुदा का खौफ
एक नौजवान किसी बुज़ुर्ग की ख़िदमत में हाज़िर हुआ और कहने लगा हज़रत! आप फरमाते हैं कि बद निगाही से परहेज़ करो। पर मैं नौजवान हूँ , बाज़ार से गुज़रते हुए मेरी निगाह क़ाबू में नहीं रहती मैं क्या करूँ...?
बुज़ुर्ग ने कहा - "मैं ये राज़ समझाऊँगा पर पहले मेरा एक काम कर दो...।" उसने कहा मैं तैयार हूँ, तो फ़रमाया कि फ़लाँ बुज़ुर्ग बाज़ार में रहते हैं, उनको ये दूध से भरा हुआ प्याला पहुंचा के आ जाओ...। नौजवान तैयार हो गया...। बुज़ुर्ग ने आगे कहा "दूध को गिरने मत देना...।" नौजवान ने कहा - "आप फ़िक्र न करें, एक क़तरा भी नहीं गिरेगा...।" बुज़ुर्ग ने कहा ठीक है अगर एक क़तरा भी नीचे गिर गया तो एक बन्दे को साथ में भेजूंगा और जैसे ही दूध का कोई क़तरा नीचे गिरा तो यह बन्दा तुम्हें वहीं पे थप्पड़ मारेगा और ज़लील करेगा...। नौजवान ने कहा मंजूर है और फिर बुज़ुर्ग ने दूध का प्याला लबालब भर के उसे दे दिया और एक ताक़तवर आदमी को उस के साथ भेज दिया...।
अब वो नौजवान बड़ी एहतियात के साथ चलते हुए, बचते बचाते बिल आख़िर अपनी मंजिल पर पहुंच गया...। फिर ख़ुशी-ख़ुशी वापस लौट कर बुज़ुर्ग के पास आकर कहने लगा कि हज़रत! वो दूध का प्याला मैनें मन्ज़िल तक पहोंचा दिया, अब मुझे नज़र की हिफ़ाज़त का तरीक़ा बताएँ...। बुज़ुर्ग ने फ़रमाया "नौजवान" दूध तो तुमने पहुंचा दिया लेकिन आज बाज़ार से गुज़रते हुए तुमने कितने लोगों को देखा...? कहने लगा "इधर-उधर ध्यान ही नहीं था...।" बुज़ुर्ग - क्यों नहीं था....?
नौजवान - हज़रत! दिल में ख़ौफ था कि अगर दूध का एक क़तरा भी नीचे गिर गया तो साथ चलने वाला मुझे भरे बाज़ार में जूते लगाएगा और मेरी रुसवाई होगी...। तो बुज़ुर्ग ने फ़रमाया कि अल्लाह वालों का भी यही हाल होता है... वो समझते हैं कि अगर गुनाह के ज़रिये ये दिल का प्याला छलक गया तो क़यामत के दिन सरे आम रुसवाई होगी...। इसी लिए उनकी निगाह इधर-उधर नहीं उठतीं...।
