देव दूत
देव दूत
अलका बार बार दरबाजे पर जाकर वापस आ रही थी ।अनुज बंटी को स्कूल से छोड़ कर कब से आ जाते हैं आज क्या हो गया ,अभी तक लौट कर नहीं आये! उसने मोबाइल से प्रयास किया किंतु अनुज मोबाइल घर पर ही छोड़ गये थे.उसकी चिंता और बढ़ गयी, उसने आनन फानन अपना और अनुज का फोन उठाया और स्कूल पहुँच गयी ! वहां पता चला अनुज बंटी को स्कुल छोड़ कर चला गया था! अब उसकी चिंता और घबराहट बढ़ गयी थी। उसने रिक्शा किया और घर की तरफ चल दी कि शायद अनुज किसी काम से कहीं चला गया हो और अब घर पहुंच गया हो।
जुलाई का महिना था बरीश भी रुक रुक कर हो रही थी। वह घर पहुंची लेकिन अनुज अभी भी घर नही पहुंचा था। वो अभी सोच ही रही थी कि अब क्या करे तभी एक औटो वहाँ रुका उसमें से एक लम्बी दाढ़ी वाला कुर्ता पाजामा पहने एक आदमी उतरा जो औटो से किसी को उतरने मे मदद कर रहा था! वो कोइ ओर नहीं अनुज था। उसके माथे पर पट्टी बंधी थी ओर एक हाथ मे प्लास्चटर चढ़ा हुआ था।.अनुज को देखते ही वह भाग कर औटो के पास पहुँची ओर उस आदमी से सवालों की बौछार कर दी। उस आदमी ने बताया बहन घबरााइये मत, भैया का मेरे घर के सामने स्कूटर फिसल गया था और ये गिर गये थे, इन्हे तुरंत अस्पताल ले गया और मरहम पट्टी करवा कर इन्हें ला रहा हूं। उसने अनुज को सहारा देकर घर के अंदर ले आई ओर बेड पर लिटाकर उस आदमी का धन्यवाद करने बाहर आयी तब तक वह जा चुका था।अलका सोचने लगी पहनावे से वोआदमी मुसलमान लग रहा था, किंतु संकट मे फंसे अनुज को वह अस्पताल लेकर गया ओर उसका उपचार भी करवाया ओर बिना कुछ कहे उसे घर छोड़ कर चुपचाप चला भी गया, सही मायने मे वो एक देव दूत कि तरह था।
