आकाशवाणी
आकाशवाणी
कहानी उस समय की है, जब तीन मित्र बेरोजगार थे और किसी तरह अपना समय व्यतीत करते, उनमें से एक मित्र का नाम सुरेश था दूसरे का नाम महेश था और तीसरा रामलू कहा जाता था। तीनों एक जगह पर बैठकर अपने भाग्य को कोस रहे थे और उनके ऊपर होनेवाले वाले अत्याचारों की कहानी सुना रहे थे, तभी उनके सामने से एक महंत गुजरे और उन्होंने ये सारी बातें सुन ली। वे उनके पास आकर बोले कि क्या तुम राजा बनना चाहते हो? तब सुरेश ने उन्हें जवाब दिया नहीं, बाबा हम पहले से परेशान हैं, आप ही राजा बन जाओ। रामलू ने कहा, कोई बात नहीं बाबा, बताइए हम कैसे राजा बन सकते हैं? अंत में महंत ने बताया ,'देखो उस पहाड़ी के ऊपर जो पेड़ दिख रहा है, उसके पास तुम तीनों चार बजे भोर में आ जाओ, वहां आने के बाद मैं बताऊंगा कि तुम कैसे राजा बन सकते हो' तीनों अपने-अपने घर गए। हर दिन की तरह उन्हें खरी-खोटी सुननी पड़ी। किसी के माँ बाप खाना देने के लिए तैयार नहीं थे, तो किसी ने अपने बेटे को अपने ऊपर बोझ कहां, परंतु तीनों के ऊपर इन बातों का कोई असर नहीं हुआ क्योंकि वे जान रहे थे अगली सुबह हम राजा बनने वाले हैं। जब राजा बन जायेंगे, तब सभी हमारे महत्व को जानेंगे ।किसी तरह रात बीती 4:00 बजने से पहले ही तीनों बताए पहाड़ी के पेड़ के पास जाकर खड़े हो और महंत का इंतजार करने लगे जैसे-जैसे समय बीतता गया इनकी बेचैनी बढ़ती गई। निर्धारित समय पर महंत जी आए तीनों ने एक स्वर में शिकायत किया आपने आने में काफ़ी समय लगा दिया। महंत जी ने बताया मैं समय से हूं अभी चार ही बज रहा है। बहस खत्म हुई। महंत ने दूसरी पहाड़ी की तरफ इशारा करते हुए बताया कि' कल सुबह 4:00 बजे से पहले तुम्हें उस पहाड़ी वाले बरगद के पेड़ तक पहुंचना है, जो पहुंच जाएगा वह राजा बन जाएगा।'
तीनों ने उत्साह पूर्वक कहा 'कल सुबह 4:00 बजे क्या हम आज ही वहां पहुंच जाएंगे' और इस तरह से तेजी से चलना शुरू किया। इन्होंने पहले तो दौड़ना शुरू किया फिर थक जाने के बाद चलना शुरू किया। जब अपना ही शरीर उन्हें भारी लगने लगा तब अपने साथ लाए हुए सामान को भी एक-एक करके रास्ते में फेंकने लगे यह जान लेना आवश्यक है कि पहाड़ों पर दिखने वाली नज़दीक की चीज है नज़दीक नहीं होती बहुत ही दूर होती हैं इनके साथ भी ऐसे हुआ धीरे धीरे अंधेरा होने लगा। उन्होंने निश्चय किया अब हम तीनों मिलकर साथ चलेंगे क्योंकि अंधेरे में कुछ दिखाई नहीं देता है कभी ऊंचा पहाड़ तो कभी आगे खाई भी हो सकता है। सुरेश इतना थक चुका था कि उसने कहा कि मैं अब आगे जाने वाला नहीं हूं परंतु रामलू ने समझाया कि जितनी आगे चढ़ाई तुम्हें उतनी ही दूरी पीछे भी है। तो तुम क्यों ना हमारे साथ चलो, रामलू की बातें सुनकर तीनों एक साथ चलने लगे। तभी आकाशवाणी हुई कि तुम्हारे आस-पास जो कुछ भी है उसे तुम इकट्ठा कर लो। रामलू ने चीजों को बैग में भरना शुरू किया परंतु सुरेश ने कहा कि मुझे कुछ नहीं चाहिए। उसने कुछ भी लेना या इकट्ठा करना उचित नहीं समझा। जबकि महेश ने अपने पॉकेट में थोड़ी सी आसपास की चीजें रख ली। किसी तरह रात बीती तीनों समय से पहले उस पेड़ तक पहुंच गए थे। उन्होंने निश्चय कर लिया कि यह वही पेड़ है जिस पर पहुंचना था। उसके बाद रामलू ने कहा कि देखो मैं तो बहुत थक चुका हूं, तुम लोग देखते रहना यदि महंत आए तो हमें जगाना। यह बोलकर वह सो गया। जब सुरेश ने रामलू को सोते हुए देखा उसे भी नींद आने लगी और वह भी सो गया इस तरह एक-एक करके तीनों सो गए। जब सुबह चिड़ियों का चहचहाना शुरू हुआ और धूप चेहरे पर पड़ी तब सुरेश उठता है और पाता है कि महंत वहां नहीं है। उसने तुरंत दोनों मित्रों को जगाया और कहा कि देखो महंत झूठा था हम लोग राजा नहीं बने तभी रामलू को याद आया कि रात में कुछ आकाशवाणी हुई थी और कुछ रखने की बात कही गई थी। उसने अपना बैग जो खोला तो उसमें पाया है कि बहुमूल्य रत्न है सोना चांदी हीरे जवाहरात वह खुशी के मारे उछलने लग गया और कहा कि मैं तो राजा बन गया। महेश ने भी अपनी जेब में हाथ डालकर देखा और कुछ चीजें पाकर प्रसन्न हुआ और कहा कि मैं भी राजा बन गया हूं परंतु छोटा जबकि सुरेश इतनी मेहनत करने के बावजूद भी कुछ भी हासिल नहीं कर पाया वजह सिर्फ एक थी उसकी नकारात्मक सोच, इसी तरह यदि आप जीवन में कितनी भी मेहनत कर लो यदि आपकी सोच सही नहीं है तो जीवन में सफलता पाना संभव नहीं है कार्य करो परंतु अच्छी नियत और सकारात्मक सोच के साथ करो जीवन में सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी रामलू और महेश की तरह।
