STORYMIRROR

Azad Ji

Abstract

3  

Azad Ji

Abstract

यादों की छाँव

यादों की छाँव

1 min
173


यादों की छाँव,

पुराना गाँव,

नया शहर

वहीं ठाँव,,

सब आते हैं,

याद बारी बारी,,

वही रस्ते

वही पाँव,,

मौज लहरें,

और किनारे भी,,

बीच भंवर

वही नदी नाँव,,

रात अकेली,

झींगुरों की झीं झीं,,

और श्वानों की

वहीं झाँव झाँव,,

ऐसे में ये यादें,

घुमड़ घुमड़ आएं,

शीतलता देवें कि

वही जीवन के आँव।




Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract