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Iffat Zahra Rizvi

Inspirational

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Iffat Zahra Rizvi

Inspirational

वतन के नाम पैग़ाम

वतन के नाम पैग़ाम

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सुन मेरे वतन, यह याद रहे, पैग़ाम मैं तुझको देती हूँ।

हर साँस मेरी है तुझमें बसी, बस नाम तेरा मैं लेती हूँ।।


हिम सी शीतल तेरी पुरवाई, क्या खूब लगे तेरी अँगड़ाई।

माटी की भीनी ख़ुशबू ने, चहुँ ओर फ़िज़ा है महकायी।

विलक्षण तेरी मूरत है, दिल जान मैं तुझको देती हूँ ।।

सुन मेरे वतन, यह याद रहे, पैग़ाम मैं तुझको देती हूँ।


कश्मीर तेरे है भाल सजे, सोने के मुकुट सा है चमके।

है कन्याकुमारी छोर तेरा, बन वैभवता यह तेरी दमके।

रहूँ जहाँ भी मैं तेरा मान बनूँ , मैं तुझको वचन यह देती हूँ।।

सुन मेरे वतन, यह याद रहे, पैग़ाम मैं तुझको देती हूँ।


हैं लाख तेरे दुश्मन गुज़रे, तेरे सामने ना टिकने पाए।

टकराये तेरे जो बच्चों से, वह अपने मुँह की ही खाए।

धरा शिरोमणी भारत है तू, तेरी बलाएँ लेती हूँ।।

सुन मेरे वतन, यह याद रहे, पैग़ाम मैं तुझको देती हूँ।


वो हिन्दू हों या हों मुस्लिम, सिख हों या हों वो ईसाई।

सब भारतवासी पहले हैं, हैं एक सभी भाई भाई।

ना टूटे बन्धन प्रेम प्यार का, दिल से दुआ यह देती हूँ।।

सुन मेरे वतन, यह याद रहे, पैग़ाम मैं तुझको देती हूँ।


माँ बनकर तूने मुझे पाला, बेटी का फ़र्ज़ निभाऊँगी।

गर आंच जो तुझपर आएगी, मैं जान फ़िदा कर जाऊँगी।

मैं भारत माँ तेरी बेटी हूँ, आशीष मैं तुझसे लेती हूँ।।

सुन मेरे वतन, यह याद रहे, पैग़ाम मैं तुझको देती हूँ।



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