STORYMIRROR

Good leaf

Abstract

3  

Good leaf

Abstract

वसंत तू बड़ा मस्त रे

वसंत तू बड़ा मस्त रे

1 min
163


वसंती बहार की मौज में

दिल लेता हिलोर रे

महबूब को मिलने का 

दिल हुआ आज तो

वसंत तू बड़ा मस्त रे।


वसंत तू क्या कमाल रे

पवन चले पलाश में

बौर का रूबाब तू

मन का पंछी भी उड़ाये तू

वसंत तू बड़ा मस्त रे।


गुलाबी मेरे गाल हुये

नैन साजन की राह तके

दिल को न रोक सके

टोके न रोक सके

वसंत बहार आयो रे।


गीत होठों पे आये

सपने नैनों में छाये

आज तो दिल झूमे गाये

मस्त हुआ साज़ रे

वसंत तू बड़ा मस्त रे।




विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract