STORYMIRROR

मालती मिश्रा

Abstract

2  

मालती मिश्रा

Abstract

वंदना

वंदना

1 min
18

करती हूँ वंदन नित अभिनंदन कृपा करो माँ शारदे

वरदहस्त मेरे शीश धरो माँ त्रुटियाँ सभी बिसार दे

भेदभाव सब छोड़ के पीछे पर उपकार का मार्ग गहूँ

समग्र विश्व हो कुटुंब समाना ज्ञान का ऐसा सार दे।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from मालती मिश्रा

वंदना

वंदना

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Abstract