वक़्त
वक़्त
जिस को वक्त़ रहते पकड़ लिया
तो सारी ख्वाहिशें पूरी हैं।
और जो छोड़ दिया तो जिंन्दगी के
असल मायने एक सबक बनकर सामने हैं।
वक्त़ जो किसी चीज की कीमत बताता है,
फिर चाहे वो चीज मिलने से पहले हो या
उसके चले जाने के बाद वक़्त सब बताता है।
वक्त़ जो अपनों के साथ बिताते समय
कब निकल जाता है पता नही चलता है,
और जब अपनो से दूर होते है तो काटते नहीं कटता है
ये वक्त़ ही तो है जो वक्त़ की अहमियत बताता है।
इसलिए इस वक्त़ को पकड़कर
जि़न्दगी की सारी ख़्वाहिशें पूरी करो,
क्योंकि वक्त़ बीत रहा है,
हाँ वक़्त बीत रहा है।
