वीर कभी मरते नहीं
वीर कभी मरते नहीं
मरते है इन्सान मगर
वीर कभी मरते नहीं |
तजते है वो प्राण अपने ,
शीश कभी झुकते नहीं |
आज़ादी है इनकों प्यारी,
शीश हथेली धरते है |
ओरों को कराते अमृतपान,
खुद हलाहल पीते है |
देते है अपना सब कुछ ये,
पन्नों पर छपते नहीं |
मरते है इन्सान मगर
वीर कभी मरते नहीं |
तजते है वो प्राण अपने ,
शीश कभी झुकते नहीं |
